इंदौर:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हरियाणा के समालखा में कल से आरम्भ होकर 15 मार्च तक होगी. संघ के लिए यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली और संरचना में बड़े बदलावों पर विचार होने वाला है. हर वर्ष होने वाली इस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को संघ की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था माना जाता है, जहां संगठन के भविष्य की दिशा तय की जाती है. इस बार की बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा संघ की संगठनात्मक व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर है.
सूत्रों के अनुसार संघ अपनी पारंपरिक संगठनात्मक संरचना में एक बड़ा परिवर्तन करने की तैयारी कर रहा है. अब तक संघ की व्यवस्था क्षेत्र, प्रांत और विभाग जैसी इकाइयों के आधार पर संचालित होती रही है. यह ढांचा लंबे समय से संघ के विस्तार और संचालन का आधार रहा है. लेकिन समय के साथ बदलती सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए संघ अब अपने ढांचे को अधिक व्यावहारिक और समकालीन बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
प्रस्तावित नई व्यवस्था के अनुसार संघ की संगठनात्मक संरचना को देश की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप ढालने की योजना बनाई जा रही है. यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो भविष्य में संघ की इकाइयां राज्य, संभाग और जिला स्तर पर कार्य करेंगी. इसका अर्थ यह होगा कि संघ के भीतर भी राज्य प्रचारक, संभाग प्रचारक और जिला प्रचारक जैसी नई जिम्मेदारियां और पद संरचनाएं विकसित होंगी. इससे संगठन की कार्यप्रणाली को अधिक स्पष्ट और प्रशासनिक दृष्टि से सुव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा.
लगातार बढ़ते विस्तार की महत्वपूर्ण भूमिका
संघ के जानकार मानते हैं कि इस बदलाव के पीछे संगठन के लगातार बढ़ते विस्तार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. पिछले एक दशक में संघ की शाखाओं और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों का तेजी से विस्तार हुआ है. शिक्षा, सेवा, सामाजिक कार्य और वैचारिक गतिविधियों के क्षेत्र में संघ की उपस्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुकी है. ऐसे में संगठनात्मक ढांचे को अधिक सरल और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप बनाना एक स्वाभाविक कदम माना जा रहा है.
समन्वय बेहतर हो सकेगा
यह भी माना जा रहा है कि नई संरचना से संघ के कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय बेहतर हो सकेगा. जब संगठन की इकाइयां राज्य, संभाग और जिला स्तर पर होंगी तो सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर काम करते समय स्थानीय परिस्थितियों को समझना और योजनाओं को लागू करना अधिक आसान हो जाएगा. इससे संघ के सेवा और सामाजिक कार्यक्रमों की प्रभावशीलता भी बढ़ सकती है.
2027 से लागू होगा परिवर्तन
हालांकि यह परिवर्तन तुरंत लागू नहीं किया जाएगा. जानकारी के अनुसार यदि प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नई व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होगी और इसे वर्ष 2027 तक पूरी तरह लागू किया जाएगा. इस बीच संगठन अपने कार्यकर्ताओं को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार करने और प्रशासनिक समायोजन की प्रक्रिया को पूरा करेगा.
कई मुद्दों पर होगी चर्चा
संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठकों में केवल संगठनात्मक निर्णय ही नहीं लिए जाते, बल्कि देश और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार किया जाता है. इसलिए समालखा में होने वाली इस बैठक में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और समकालीन राष्ट्रीय चुनौतियों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है. इस बार बैठक में सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत और संपूर्ण अखिल भारतीय कार्यकारिणी सहित 1450 प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे
