
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने व्यापमं घोटाले से जुड़े तीन मामलों में दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य कार्रवाई निरस्त कर दी। दोनों पर मध्यस्थता करने का आरोप था। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने कहा है कि आवेदकों के मामले में जांच के दौरान यह साबित नहीं हुआ कि वास्तविकता में पैसे का लेनदेन हुआ है।
भोपाल निवासी सोनू पचौरी व रामनिवास पटैल की ओर से अधिवक्ता कपिल शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सोनू के खिलाफ पीएमटी 2012 एवं 2013 परीक्षा के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं रामनिवास को पीएमटी 2013 में आरोपी बनाया गया था। इन पर आरोप था कि इनके पास से डायरी बरामद हुई है, जिसमें कुछ नाम हैं और उनके सामने राशि अंकित है। दलील दी गई कि चार्जशीट में भी यह बात सामने नहीं आई कि आरोपियों ने पैसे लिये हैं। जिसके बाद न्यायालय ने कहा कि सीबीआई इन मामलों में उपयुक्त सबूत नहीं जुटा पाई है, उक्त मत के साथ न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
