
जावद। नीमच से करीब 18 किमी दूर नगर की पुरानी धानमंडी में कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी की चल मूर्ति विराजित है। ऐसा माना जाता है कि रंगपंचमी से रंगतेरस तक इनके दर्शन-पूजा करने से कुंवारों की मनोकामना पूर्ण होती है। अध्यात्मिक नगरी जावद में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी आस्था का प्रमुख केंद्र ‘कुंवारों के देवता’ बिल्लम बावजी का पारंपरिक महोत्सव शुरू हो गया है। रंगपंचमी के शुभ अवसर पर रविवार को धानमंडी और सराफा बाजार स्थित रिद्धि-सिद्धि गणपति मंदिर के समीप, बिल्लम बावजी को पूर्ण विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में नवनिर्मित मार्बल के मंदिर में विराजित किया गया।
धूमधाम से निकला चल समारोह
स्थापना से पूर्व भगवान बिल्लम बावजी की प्रतिमा को ठेला गाड़ी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया गया। ढोल-धमाकों की थाप और जयकारों के बीच यह यात्रा लक्ष्मीनाथ चौक तक पहुंची। इस दौरान पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया। महाआरती के पश्चात उपस्थित जनसमूह को प्रसाद वितरित किया गया।
केवल पान और नारियल से प्रसन्न होते हैं देवता
यहां मन्नत के रूप में बिल्लम बावजी देवता को एक पान और नारियल भेंट कर मनोकामना मांगी जाती है. जिस युवक या युवती की शादी की अर्जी लगाई जाती है, उसे चढ़ाया हुआ पान खाना होता है. इसके बाद उसके यहां शहनाई बज ही जाती है. ऐसे हजारों उदाहरण है जिनकी शादी सालों से नहीं हो रही थी, लेकिन अर्जी लगाने के चंद दिनों में ही शादी हो गई।
कुई से निकली थी बिल्लम बावजी की प्रतिमा
पुजारी जी बताते हैं ‘करीब 50 वर्षों पूर्व गणेश मंदिर की कुई की साफ-सफाई के दौरान यह प्रतिमा निकली थी. जिसे कहीं स्थापित नहीं किया गया बल्कि कुई के थारे (किनारे) पर ही विराजित कर दिया गया. लेकिन रंग पंचमी से लेकर रंग तेरस के दिन तक सडक़ पर स्थित बिजली के पोल के पास इनकी स्थापना की जाती है. जहां नौ दिनों तक पूजा-अर्चना, अर्जी और मन्नतों का दौर चलता है.
यहां हो जाता है लिंग अनुपात का सर्वे
इस मंदिर के बारे में एक रोचक जानकारी देते हुए स्थानीय पत्रकार नारायण सोमानी ने बताया कि यहां क्षेत्र के लिंग अनुपात का भी सर्वे हो जाता है. वैसे तो बिल्लम बावजी कृपा करने में लडक़ा-लडक़ी का भेदभाव नहीं करते. लेकिन यहां आने वाले फरियादियों में ज्यादा संख्या अविवाहित युवकों की ही होती है. जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे समाज में बालिकाओं की संख्या तेजी से कम हुई है. यही वजह भी है कि विवाह योग्य हो चुके युवकों को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं.
रंगपंचमी से रंगतेरस तक होती है विशेष पूजा
बिल्लम बावजी की मूर्ति जावद नगर के श्री रिद्धिसिद्धि गणपति मंदिर में विराजित रहती है। परंपरा के अनुसार, रंगपंचमी के दिन इस मूर्ति को विशेष अनुष्ठान के साथ बाहर निकाला जाता है और नगर भ्रमण कराया जाता है। इसके बाद 9 दिनों तक भक्तजन उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और कुंवारे युवक-युवतियां शादी की मनोकामना लेकर उनके दर्शन के लिए आते हैं।
मीडिया प्रभारी व भाजपा नेता नारायण सोमानी ने बताया कि बिल्लम बावजी आगामी 17 मार्च (रंगतेरस) तक भक्तों को दर्शन देंगे। मान्यता है कि यहाँ साष्टांग प्रणाम कर मन्नत मांगने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। यही कारण है कि यहाँ मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में युवक-युवतियां और नवविवाहित जोड़े मन्नत उतारने पहुँचते हैं। श्रद्धालु यहाँ नारियल, अगरबत्ती और मीठे पान का भोग अर्पित करते हैं।
नव दंपती संतान प्राप्ति के लिए मांगते हैं मन्नत
शादी होने की मन्नत पूरी होते ही दंपती एक साथ बिल्लम बावजी के चरणों मे माथा टेकते हैं। वे संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होते ही संतान को भी बावजी का आशीर्वाद दिलाते हैं।
क्षेत्र की खुशहाली की कामना
इस अवसर पर भाजपा नेता नारायण सोमानी ने बावजी के दर्शन कर क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में स्वर्णकार सोनी समाज के जिला अध्यक्ष नरेंद्र सोलीवाल, अशोक अग्रवाल, राजेश चांडक सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारगण उपस्थित रहे।
