भारत,जापान के बीच पांच साल में होगा पांच लाख कर्मियों का आदन प्रदान

टोक्यो, 29 अगस्त (वार्ता) भारत और जापान ने अगले पांच साल में आपस में पांच लाख कर्मियों के आदान प्रदान का लक्ष्य रखा है जिसमें भारत से जापान के कुछ क्षेत्रों में काम के लिए पचास हजार कुशल और प्रतिभावान कर्मी भी बुलाए जा सकते हैं । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच शुक्रवार को हुए सहयोग के विभिन्न समझौतें में एक समझौता मानव संसाधन के आदान प्रदान में सहयोग का समझौता भी शामिल है।

विदेश मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरान भारत से जापान में सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में 50,000 कुशल और प्रतिभावन कर्मियों को आमंत्रित किया जा सकता है।

श्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशीबा के बीच बातचीत में दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपस में गहरी समझ विकसित करने तथा दोनों की राष्ट्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में देखते हुए मानव संसाधन के विकास में सहयोग के रास्ते खोजने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की गयी। बयान में कहा गया है कि दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में दोनों दिशाओं में 500,000 से अधिक कर्मियों के आदान-प्रदान का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें भारत से जापान के लिए 50,000 कुशल कर्मी और संभावित प्रतिभाएँ शामिल हैं, ताकि भारत और जापान के बीच लोगों के बीच आदान-प्रदान की एक नई लहर पैदा हो सके।

दोनों देशों के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान दोनों देशों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने के लिए कर्मियों के आदान-प्रदान का विस्तार करने का प्रयास करेंगे।

इस करार का उद्येश्य भारत से जापान में कुशल कर्मियों और संभावित प्रतिभाओं को आकर्षित करना और देनों देशों के लोगों में इससे जुड़ी धारणाओं के अंतर को पाटना, भारत में जापानी भाषा शिक्षा को बढ़ावा देना, भारत में कौशल विकास को बढ़ावा दे कर विनिर्माण क्षेत्र को मज़बूत करना तथा जापानी कंपनियों और भारतीय छात्रों के बीच संपर्क बिंदुओं को मज़बूत करना भी है।

समझौते के अनुसार भारत और जापान संयुक्त रूप से एक कार्ययोजना पर काम करेंगे ताकि अगले 5 वर्षों में जापान में भारतीय इंजीनियरिंग पेशेवरों और शैक्षणिक कर्मियों के प्रवाह को बढ़ाया जा सके।

 

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