महिला दिवस विशेष : कान्हा की महिला गाइड बन रहीं सशक्तिकरण की नई पहचान

बालाघाट: देश के प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों में शामिल कान्हा टाइगर रिजर्व आज केवल वन्यजीव संरक्षण ही नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी प्रेरक उदाहरण बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यहां कार्यरत महिला गाइडों की पहल यह साबित कर रही है कि जंगलों के बीच भी महिलाएं आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की नई कहानी लिख रही हैं।

उप संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश के मंडला एवं बालाघाट जिलों में फैला कान्हा टाइगर रिजर्व भारत की प्रारंभिक नौ बाघ परियोजनाओं में शामिल रहा है और आज यह देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन केंद्र है। यहां वन्यप्राणियों और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन के माध्यम से जनजागरूकता भी बढ़ाई जाती है, ताकि लोगों में जंगल और वन्यजीवों के प्रति प्रेम व जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

महिला गाइड: पर्यटन क्षेत्र में नई पहचान

कान्हा टाइगर रिजर्व में अब स्थानीय महिलाएं पर्यटन गाइड के रूप में नई पहचान बना रही हैं। मुक्की ग्राम की महिलाएं गाइड के रूप में कार्य कर न केवल पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के बारे में जानकारी दे रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान रहे इस क्षेत्र में अब महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास

कान्हा प्रबंधन द्वारा चयनित 15 महिला गाइडों को वन्यजीवों, पारिस्थितिकी, स्थानीय संस्कृति तथा जंगल के व्यवहार संबंधी विषयों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें हिंदी और अंग्रेजी में संवाद कौशल, आपातकालीन स्थिति से निपटने और पर्यटकों की बेहतर सेवा के लिए भी प्रशिक्षित किया गया है।

वर्तमान में 13 महिला गाइड मुक्की प्रवेश द्वार, 1 खटिया प्रवेश द्वार और 1 सरही प्रवेश द्वार पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन महिलाओं के लिए यह रोजगार का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

समाज में बढ़ा सम्मान

महिला गाइड बनने के बाद इन महिलाओं को समाज में नई पहचान और सम्मान मिला है। अब वे परिवार की आय में योगदान देने के साथ-साथ सामाजिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह पहल न केवल लैंगिक समानता को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों को भी नई दिशा दे रही है।

स्थानीय रोजगार और संस्कृति का संरक्षण

इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है, जिससे उनका शहरों की ओर पलायन भी कम हुआ है। साथ ही वे अपनी स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जंगल से जुड़े अनुभवों को पर्यटकों के साथ साझा कर रही हैं, जिससे पर्यटन को भी स्थानीय रंग और प्रामाणिकता मिल रही है।

पर्यटकों को मिलता है अलग अनुभव
महिला गाइडों की संवेदनशीलता सहज व्यवहार और जंगल से जुड़ी कहानियां पर्यटकों के अनुभव को और अधिक रोचक बना देती हैं। वे जिस आत्मीयता से वन्यजीवों, प्रकृति और स्थानीय जीवन के बारे में जानकारी देती हैं, उससे कान्हा की यात्रा पर्यटकों के लिए यादगार बन जाती है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में महिला गाइडों की यह पहल सामाजिक नवाचार, महिला सशक्तिकरण और सतत पर्यटन का सफल उदाहरण बन चुकी है। यह पहल यह संदेश देती है कि अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।

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