रियाद/जकार्ता | ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने सऊदी अरब में उमराह के लिए आए हजारों जायरीन की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद होने और उड़ानों के अचानक रद्द होने से विशेष रूप से इंडोनेशिया के लगभग 58,860 और मलेशिया के 1,600 से अधिक तीर्थयात्री जेद्दा और मदीना में फंस गए हैं। कई देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘कंट्रोल रूम’ स्थापित किए हैं और एयरलाइंस के साथ कूटनीतिक बातचीत शुरू कर दी है, ताकि फंसे हुए लोगों को युद्ध क्षेत्र के पास से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
युद्ध की आहट ने जायरीन के आध्यात्मिक सफर को गहरे डर और आर्थिक बोझ में बदल दिया है। होटलों में रुकने का अतिरिक्त खर्च और वापसी के टिकटों की अनिश्चितता ने निम्न आय वर्ग के तीर्थयात्रियों की कमर तोड़ दी है। जनीराह फारिस जैसी कई जायरीन ने बताया कि फ्लाइट रद्द होने के कारण उन्हें अब 12 मार्च तक महंगे होटलों में रुकना पड़ रहा है, जिसके लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं बचे हैं। वहीं, मिस्र और कुवैत जैसे पड़ोसी देशों के नागरिक अपने बच्चों की सुरक्षा के डर से हवाई मार्ग छोड़ जोखिम भरे सड़क रास्तों से कार द्वारा घर लौटने को मजबूर हैं।
रमजान का पवित्र महीना करीब होने के कारण आमतौर पर इस समय सऊदी अरब में दुनिया भर से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं, लेकिन मौजूदा लॉजिस्टिक संकट ने पूरे एशिया और अफ्रीका के यात्रा रूट को प्रभावित किया है। इंडोनेशियाई सरकार ने सुरक्षा कारणों से लगभग 60,000 अन्य लोगों को अपनी अप्रैल तक की यात्रा टालने की सख्त सलाह दी है। यह मानवीय संकट अब एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है, जहाँ फंसे हुए लोग हर पल अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर रहे हैं ताकि वे जल्द से जल्द अपने परिवारों और काम पर लौट सकें।

