नई दिल्ली | भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज गगन नारंग का आज जन्मदिन है। 6 मई 1983 को जन्मे गगन बचपन में एयरफोर्स पायलट बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। महज दो साल की उम्र में गुब्बारे पर सटीक निशाना लगाने वाले गगन की प्रतिभा को उनके पिता भीमसेन नारंग ने पहचान लिया था। उनके करियर के लिए परिवार ने भारी बलिदान दिया; गगन को पहली राइफल दिलाने के लिए उनके पिता को अपना घर तक बेचना पड़ा, जिसके बाद पूरा परिवार 15 सालों तक किराए के मकान में रहा।
गगन नारंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया और 2012 के लंदन ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय शूटर थे। इससे पहले, 2006 और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 4-4 स्वर्ण पदक जीते थे। 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका प्रदर्शन इतना शानदार था कि वे एक ही संस्करण में चार गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
अपनी कड़ी मेहनत और सटीक निशानेबाजी के दम पर गगन नारंग विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान तक पहुंचे। खेल के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न), पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा है। गगन अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के त्याग को देते हैं। आज वे अपनी अकादमी ‘गगन नारंग स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन’ के जरिए देश के भविष्य के निशानेबाजों को तैयार कर रहे हैं।

