पुणे | केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पुणे में आयोजित ‘इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी’ के सम्मेलन में एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि देश की शक्तिशाली पेट्रोलियम लॉबी उनके हरित ईंधन (Green Fuel) के प्रयासों को रोकने के लिए पूरी ताकत से उनके पीछे पड़ी हुई है। गडकरी ने कहा कि भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात करता है, और इस भारी-भरकम राशि से जुड़े हित रखने वाले लोग नहीं चाहते कि देश वैकल्पिक और सस्ते ईंधन की दिशा में आत्मनिर्भर बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लॉबी इतनी आसानी से हरित भारत के सपनों को पूरा नहीं होने देगी।
नितिन गडकरी ने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बात शुरू की थी, तब लोग उन पर हंसते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 86 प्रतिशत आयात करता है, जिसे बदलना अनिवार्य है। गडकरी के अनुसार, ग्रीन एनर्जी न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। उनका लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है, जिससे भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को गति मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में कम से कम 5,000 कंपनियां हरित ईंधन के क्षेत्र में काम कर सकती हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। उन्होंने पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का हवाला देते हुए ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया। गडकरी ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य किसानों को ‘ऊर्जादाता’ बनाना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह इस बदलाव के लिए पूरी दृढ़ता के साथ खड़े हैं और तकनीक की विश्वसनीयता व लागत के मानकों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे।

