जबलपुर: कटनी जिले की विजयराघवगढ़ तहसील के निवासी कुंजी दास बैरागी ने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का ऐसा प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो समाज में नई चेतना जगाने वाला है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की दिव्य शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्होंने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद उनके परिवारजनों ने इस पवित्र संकल्प को पूरा करते हुए उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए दान कर दिया।
जानकारी के अनुसार कुंजी दास बैरागी का उपचार सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में चल रहा था, जहां विगत 5 मार्च 2026 को उनका निधन हो गया था। इसके बाद उनके परिवारजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए 6 मार्च को मेडिकल कॉलेज में उनका देहदान कर दिया। इस महान मानवीय कार्य के लिए मेडिकल कॉलेज में प्रशासन द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया और पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
देहदान के दौरान परिवार जनो की आंखें नम रहीं। कुंजी दास बैरागी का यह महान निर्णय न केवल समाज के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं की जीवंत मिसाल भी है। उनका यह देहदान यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह मानवता की सेवा के रूप में भी प्रकट होती है।
