भोपाल: पूर्व कृषि मंत्री एवं कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने किसानों को उत्पादन लागत, बाजार भाव, फसल बीमा और संस्थागत व्यवस्था—हर अहम मोर्चे पर जानबूझकर अकेला छोड़ दिया है। भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि संकट किसी प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि एक “सोची-समझी किसान विरोधी नीति” का परिणाम है।
पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए सचिन यादव ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने किसानों को सुरक्षा, सम्मान और स्थिरता प्रदान की थी। उन्होंने जय किसान ऋण माफी योजना का हवाला देते हुए बताया कि इसके तहत 27 लाख किसानों का ₹11,500 करोड़ का फसल ऋण माफ किया गया था। साथ ही 10 हॉर्स पावर तक के कृषि बिजली कनेक्शन पर बिल आधा किया गया था और मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना के माध्यम से प्याज किसानों को लाभकारी दाम सुनिश्चित किए गए थे ।
नकली खाद-बीज पर सख्त कार्रवाई, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी में वृद्धि और 1,000 से अधिक गौशालाओं के निर्माण को भी उन्होंने किसान हितैषी कदम बताया।
इसके विपरीत, यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र के वादों से मुंह मोड़ लिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को 10 घंटे निर्बाध बिजली नहीं मिल रही, वर्ष 2025 में सोयाबीन की सरकारी खरीदी बंद कर दी गई है और गेहूं-धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी केवल कागजों तक सीमित है।
मूंग, मक्का, कपास, प्याज और केला उत्पादक किसान भारी संकट में हैं, जहां भुगतान में देरी, एमएसपी से कम दाम और फसल बीमा से वंचित किए जाने की स्थिति बनी हुई है।सचिन यादव ने खाद संकट, किसानों पर पुलिस कार्रवाई, फसल बीमा में हेरफेर से निजी कंपनियों को भारी मुनाफा और मंडी व्यवस्था को कमजोर किए जाने के भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के अधिकारों के लिए सड़क, गांव और विधानसभा
हर मंच पर संघर्ष जारी रखेगी।
