भारत वित्त वर्ष 2027-28 तक बन जायेगा चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: वित्त मंत्रालय

नयी दिल्ली, 06 मार्च (वार्ता) वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत वित्त वर्ष 2027-28 तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा।

मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने फरवरी 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में यह बात कही है। इसमें कहा गया है कि फरवरी में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की नयी सीरीज जारी होने के बाद 31 मार्च को समाप्त हो रहे मौजूदा वित्त वर्ष में वर्तमान मूल्यों पर आधारित नॉमिनल जीडीपी का अनुमान 357.1 लाख करोड़ रुपये से घटकर 345.5 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में रुपये में बड़ी गिरावट रही है।

समीक्षा के प्राक्कथन में कहा गया है कि दोनों कारकों को देखते हुए “भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027-28 तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है”।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल भारत के चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था बनने की घोषणा कर दी गयी थी लेकिन डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट से डॉलर में जीडीपी का आंकड़ा कम हुआ है।

समीक्षा रिपोर्ट में ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उससे पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात पर भी चिंता व्यक्त की गयी है। इसमें कहा गया है कि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में दूसरे देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भी हमले किये। तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों पर भी हमले हुए हैं जिससे आपूर्ति में अस्थायी व्यवधान आया है। फिलहाल हर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद है। यदि यह जलडमरूमध्य इसी तरह बंद रहा तो कच्चे तेल के दाम में तेजी जारी रहेगी और यह 100 डॉलर प्रति बैरल का पार पहुंच सकता है।

मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी इस संघर्ष का भारत पर गंभीर असर होगा और फिलहाल ना-मालूम रूपों में लंबे समय के लिए हो सकता है। उसने कहा कि हालिया घटनाक्रम ने आने वाले समय में प्राकृतिक संसाधनों के ज्यादा भंडारण की जरूरत को रेखांकित किया है। वित्तीय संसाधन भी जुटाने होंगे जिसके कारण आने वाले वर्षों में प्राथमिकताओं की बदलाव की जरूरत होगी।

इसमें कर नीति तथा कर प्रशासन में स्थिरता तथा निरंतरता की वकालत की गयी है ताकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक यहां निवेश के लिए आकर्षित हों। इस संघर्ष के कारण भारत के भुगतान संतुलन को लेकर भी जोखिम बढ़ गया है।

मंत्रालय ने भारतीय व्यापारियों को विभिन्न देशों और आर्थिक क्षेत्रों के साथ हाल में हुई मुक्त व्यापार संधियों (एफटीए) का लाभ उठाते हुए इस अवसर को लपकने की सलाह दी है। इसके लिए गुणवत्ता, अनुसंधान एवं विकास और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को जरूरी बताया गया है।

समीक्षा में कहा गया है कि भारत इस समय आर्थिक दृष्टि से मजबूत स्थिति में है, लेकिन यह आत्म संतुष्ट होने का समय नहीं है और न ही कोविड के बाद के अपने प्रदर्शन पर आत्ममुग्ध होने का – वह अब इतिहास की बात है। भविष्य उतना ही अनिश्चित हो चुका है।

मंत्रालय कहना है कि यह भारत के लिए एक अवसर भी है। सरकार की उद्यमों के अनुकूल नीति और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता निवेशकों के लिए ज्यादा अनमोल हो सकती है जो भुगतान संतुलन पर दबाव कम करने में सहायक को सकता है।

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