सिडनी, 04 मार्च (वार्ता) कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होता, लेकिन अपनी कार्रवाई पर अंतिम फैसला अमेरिका और इजरायल के हाथ में है। श्री कार्नी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बल प्रयोग पर प्रतिबंध से जुड़े अपने पूर्व बयानों के संदर्भ में कहा कि मौजूदा सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह तय करना अमेरिका और इज़रायल पर निर्भर है कि उनकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है या नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध में शामिल सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में पत्रकारों से बातचीत में श्री कार्नी ने कहा कि कनाडा शत्रुता को तेजी से कम करने की अपील करता है और इस दिशा में सहयोग देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि कनाडा लंबे समय से इस गंभीर वैश्विक खतरे को निष्प्रभावी करने की आवश्यकता का समर्थन करता रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विफलता का एक और उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम निर्णय विशेषज्ञों को करना चाहिए। श्री कार्नी ने बताया कि ईरान पर हमलों से पहले कनाडा को इसकी कोई अग्रिम सूचना नहीं दी गयी थी और न ही उसे इसमें शामिल होने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा प्रस्ताव आता भी तो कनाडा अपने मानकों के अनुरूप निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होता।
उल्लेखनीय है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता ठप होने के बाद सप्ताहांत में अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले शुरू किये थे। इसके बाद संघर्ष तेजी से क्षेत्र के अन्य हिस्सों में फैल गया और ईरान के जवाबी हमलों में सऊदी अरब एवं कुवैत में अमेरिकी दूतावासों को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद अमेरिका ने क्षेत्र में कई राजनयिक मिशन अस्थायी रूप से बंद कर दिये हैं। श्री कार्नी ने शनिवार को हमलों के बाद कहा था कि कनाडा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए उसके खतरे को रोकने के लिए अमेरिका के प्रयासों का समर्थन करता है।

