नयी दिल्ली, 03 मार्च (वार्ता) देश में मंगलवार दोपहर तीन बजकर 20 मिनट से लेकर 18:48 बजे तक चंद्र ग्रहण रहा।
इस चंद्र ग्रहण के दौरान जहाँ गुवाहाटी से लेकर दिल्ली तक लोगों ने रक्त चंद्र (ब्लड मून) का दर्शन करने के लिए टेलिस्कोप का सहारा लिया, वहीं इस दौरान कई मंदिरों के कपाट बंद रहे।
शाम को चंद्र ग्रहण के समाप्त होने के बाद लोग नदियों और सरोवरों में स्नान करते नजर आये। लोगों ने मान्यता के अनुसार स्नान के बाद दान-दक्षिणा भी दी।
इस चंद्रग्रहण को देश के पश्चिमी हिस्सों में कुछ स्थानों को छोड़कर सभी स्थानों पर देखा गया। जहाँ पूर्वोत्तर और अंडमान में चंद्र ग्रहण के सभी चरण देखे गये, वहीं बाकी हिस्सों में इसका केवल अंतिम चरण ही देखा जा सका।
पूर्वोत्तर राज्यों के अगरतला, एजल, डिब्रूगढ़, गुवाहाटी, इंफाल, ईटानगर और कोहिमा जैसे शहरों में सूर्यास्त के बाद पूर्ण चंद्र ग्रहण का स्पष्ट नज़ारा देखने को मिला।
पूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सीधे सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा की सतह पर उसकी छाया पड़ती है। पूर्ण ग्रहण के दौरान, पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली सूर्य की किरणों का अपवर्तन और प्रकीर्णन होता है, जिससे केवल प्रकाश की लाल तरंगें ही चंद्रमा तक पहुंच पाती हैं। इसीलिए इस दौरान चांद लाल दिखता (ब्लड मून) है। उल्लेखनीय है कि ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ 16:34 बजे से लेकर 17:35 बजे तक रहा।
यह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका में भी देखा गया। इससे पहले भारत में चंद्र ग्रहण सात-आठ सितंबर 2025 को दिखा था, जो कि पूर्ण चंद्र ग्रहण था। देश में अगला चंद्र ग्रहण छह जुलाई 2028 को लगेगा, जो कि आंशिक चंद्र ग्रहण होगा।
