बेटी को क्यों नहीं रोक पाए सत्तन?

मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास

हाल ही में पूर्व विधायक व वरिष्ठ भाजपा नेता सत्यनारायण सत्तन अपनी बेटी को लेकर चर्चा में हैं. विगत दिनों उनकी पत्रकार सुपुत्री कनुप्रिया ने राजनीति में कदम रखा.यह कोई सनसनी नहीं थी, सुर्खियां बनने की बात थी कि उनकी राजनीतिक पारी की शुरूआत भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस ज्वाइन करने से हुई. सत्तन इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता निरुपित कर रहे हैं, मगर ऐसा नहीं है. कनुप्रिया ने आज के दौर में अपने पिता की भाजपा में उपेक्षा व हाशिए का दर्द देखा है. सत्तन चाहते तो बेटी को भाजपा में ही प्रवेश दिलवाते, पर उन्हैं इसमें कनुप्रिया के केरियर की कोई उम्मीद सामने नजर नहीं आ रही थी. एक तो इंदौर की भाजपाई गुटबाजी का शिकार वे करीब डेढ़ दशक से उपर बनते आ रहे हैं, पूछ-परख केवल चुनावी समय की रस्म बनकर रह गई है.

जब उनका यह हाल बना रखा है तो बेटी के लिए वे क्या कर पाते? दूसरा भाजपा में नरेंद्र मोदी के आने के बाद मुखर हुआ वंशवाद का विरोध भी रोड़ा बन सकता था. 2008 के लोकसभा चुनाव की कमान सत्तन को सौंपी गई थी. भाजपा प्रत्याशी सुमित्रा महाजन थीं. सत्तन चुनावी रणनीति के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे थे, लेकिन एक खेमा उसे बिगाडऩे पर तुला था. सत्तन के ही शब्दों में वे महाजन को मात्र कुछ हजार बोटों से ही जीत दिला पाए. इस गुटबाजी से व्यथित ने उस चुनाव के बाद से कभी भाजपा कार्यालय में कदम नहीं रखा. अब ऐसी स्थिति में जब बेटी ने कांग्रेस में जाने का मन बनाया तो सत्तन कुछ समझाने से रहे. वे चाहते तो रोक सकते थे, परंतु उन्होंने बेटी के कदम को नहीं रोका.

कनुप्रिया का सियासी गणित

सत्यनारायण सत्तन परिवार इंदौर विधान सभा क्षेत्र क्र. 1 का रहवासी है. कांग्रेस से कर्मचारी नेता रामलाल यादव दमदार नेता रहे हैं और विधायक भी बने. उनके निधन के बाद संजय शुक्ला भाजपा को टक्कर देते रहे.और 2018 में विधायक बने. 2023 की हार के बाद संजय शुक्ला व अन्य चर्चित नेता कमलेश खंडेलवाल के भाजपा में जाने से कांग्रेस में उपजे वेक्यूम में कनुप्रिया को यहां स्कोप नजर आ रहा है. भाजपा में टिकट की संभावना नगण्य थी. कांग्रेस ज्वाइन करने का उनका यही कारण सामने आ रहा है. कोई तगड़े प्रतिस्पर्धी के न होने का उन्हें लाभ मिल सकता है और विधान सभा का कांग्रेस टिकट मिलने की राह आसान रहेगी. बाकि उम्मीद उन्हें अपने पिता की कार्य स्थली के कारण बने उनके संपर्क पर टिकी है.

2 लाल बत्ती की आस

भाजपा ने संगठन कसावट की तैयारियां शुरू कर दी है. नेपानगर विधानसभा की पूर्व विधायक श्रीमती सुमित्रा देवी कास्डेकर को भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब बुरहानपुर वासियों को होली पश्चात संभावित मंत्री मंडल विस्तार तथा निगम मंडलों में नियुक्ति के चलते पुन: 2 लाल बत्ती मिलने की आशा है. चर्चा में कुछ नाम जोरों पर हैं. इनमें प्रदेश भाजपा प्रवक्ता अर्चना चिटनीस भी शामिल हैं.

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