तेहरान/वॉशिंगटन | ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 48 घंटे से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन उनकी ‘डेड बॉडी’ को लेकर दुनिया भर में रहस्य बना हुआ है। 28 फरवरी को हुए भीषण हमले के बाद से अब तक उनके शव की कोई आधिकारिक तस्वीर साझा नहीं की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी और इजराइली हमले के बाद मलबे से निकाले गए क्षत-विक्षत शव की तस्वीरें केवल डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को डिजिटल रूप में दिखाई गई थीं। मोसाद एजेंटों द्वारा शव को मलबे के पास छोड़ने की खबरों के बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह सवाल गूंज रहा है कि वर्तमान में ईरान के सबसे ताकतवर नेता का शव आखिर है कहाँ?
ईरान सरकार ने अब तक अंतिम संस्कार के समय या स्थान के बारे में चुप्पी साध रखी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें तेहरान के बेहश्त-ए जहरा कब्रिस्तान या उनके गृहनगर मशहद के पवित्र स्थल पर दफनाया जा सकता है। हालांकि, जारी युद्ध की भयावह स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अंतिम संस्कार को फिलहाल स्थगित कर सकता है। जिस तरह हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरुल्लाह का अंतिम संस्कार पांच महीने बाद हुआ था, वैसी ही संभावना खामेनेई के मामले में भी जताई जा रही है। युद्ध के बीच सुरक्षा कारणों से ईरान नेतृत्व इस जानकारी को गोपनीय रख रहा है।
‘वाशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट ने इस मामले में नया मोड़ दे दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि इस खुफिया ऑपरेशन के पीछे सऊदी अरब का भी हाथ हो सकता है। इस बीच, ईरान ने खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं, जिसमें भारी नुकसान का दावा किया गया है। भारत ने भी बिगड़ते हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों पर हमलों के बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की आक्रामक कार्रवाई ने पश्चिम एशिया को पूर्ण युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया है, जहाँ खामेनेई के शव का गायब होना एक बड़ी पहेली बन गया है।

