नयी दिल्ली, 28 फरवरी (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि पेटेंट फाइलिंग में भारत दुनिया भर में छठे नंबर पर पहुंच है और 60 प्रतिशत से ज़्यादा पेटेंट देश में रह रहे लोग और इकाइयां दाखिल कर रही है।
डॉ सिंह तिरुवनंतपुरम के कौडियार में ” विकसित भारत-2047: विज्ञान ,प्रौद्योगिकी और राष्ट्र के कायाकल्प के लिए भविष्योन्मुखी नवाचार” विषय पर पी. परमेश्वरन स्मारक व्याखान दे रहे थे। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम “भारतीय विचार केंद्रम” ने मशहूर विचारक, विचारक और सामाजिक नेता पी. परमेश्वरन की याद में आयोजित किया था।
भारत की सभ्यतागत यात्रा के संदर्भ के साथ अपना भाषण शुरू करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि भारत आज वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में है, देश में प्रकाशित ऐसे शोध-पत्रों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें उद्धरित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में भारत के हज़ारों वैज्ञानिकों के नाम शामिल हैं। यह देश की वैज्ञानिक प्रतिभाओं की विश्वस्तर पर पहचान को दर्शाता है।
अंतरिक्ष और परमाणु उद्योग क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों से इन क्षेत्रों में निजी सहभागिता के लिए नए रास्ते खोले हैं, इससे भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताएं भी काफी बढ़ी हैं , इनका निर्यात भी बढ़ रहा है और आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के महासागर मिशन का ज़िक्र किया और कहा कि भारत एक अनोखी जगह पर है, क्योंकि यह अकेला ऐसा देश है जिसके नाम पर एक एक महासागर (हिंद महासागर) है। उन्होंने कहा कि समुद्री संसाधनों , गहरे समुद्र में प्राप्त होने वाले खनिजों और समुद्री जैव विविधता की की खोज भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाएगी।
