वोट बैंक नहीं, अर्थव्यवस्था की रीढ़ है किसान: पटवारी

भोपाल। जीतू पटवारी ने राज्य बजट 2026–27 को लेकर तीखा हमला बोलते हुए इसे “किसान कल्याण” का दस्तावेज बताए जाने के दावे को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से खेतों में व्याप्त संकट नहीं छिपाया जा सकता।

पटवारी ने कहा कि कृषि सशक्तिकरण की बात होती है, लेकिन हकीकत यह है कि किसानों की वास्तविक आय घट रही है, जबकि लागत बढ़ रही है, फसल में जोखिम बढ़े हैं और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि डीज़ल, उर्वरक, बीज, कीटनाशक और बिजली की कीमतों में निरंतर वृद्धि हुई है, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर समय पर खरीद अब भी अनिश्चित बनी हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान में देरी, भंडारण की कमी और बाजार में उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान साहूकारों और बैंकों के कर्ज पर निर्भर होने को मजबूर हैं।

पटवारी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच किसानों और कृषि मजदूरों की कथित आत्महत्याओं के मामलों पर पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने पुनर्वास, कर्ज राहत और मानसिक स्वास्थ्य सहायता संबंधी उपायों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की भी मांग की।

उन्होंने उज्जैन और इंदौर संभाग में अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए मुआवजे और पुनर्वास को अपर्याप्त बताया।

पटवारी ने एमएसपी की कानूनी गारंटी, सिंचाई विस्तार, शून्य ब्याज पर कृषि ऋण और प्रभावी आपदा राहत की मांग करते हुए कहा कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, केवल वोट बैंक नहीं।

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