पाथाखेड़ा में कोयला मजदूरों का हल्लाबोल: शोषण के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू

सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा क्षेत्र की भूमिगत कोयला खदानों में काम करने वाले ठेका मजदूर शोषण के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। ठेका मजदूरों का साफ कहना है। जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती। तब तक हम काम पर नहीं लौटेंगे। दरअसल भूमिगत कोयला खदानों में वर्षों से कार्यरत मजदूरों का शोषण हो रहा है। मजदूरों को ना तो समय पर मजदूरी मिल रही है और ना ही सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, मिलने वाली मजदूरी का करीब 70 फ़ीसदी हिस्सा मजदूरों के वेतन से वापस ले लिया जाता है। इस तरह का शोषण सालों से झेल रहे मजदूरों के शब्द का बांध अब फूट गया है। यही वजह है कि तवा वन, तवा टू और छतरपुर 1 खदान में कोई भी ठेका मजदूर कार्य पर नहीं गए। तीनों खदानों पर प्रथम पाली में ठेका मजदूरों ने पहुंचकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। ठेका मजदूरों का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ श्रमिक नेता प्रदीप नागले, संतोष देशमुख, मनोज पवार ने बताया काम के बदले मजदूरों को पूरा दम नहीं दिया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। प्रति माह 1 से 7 तारीख को वेतन मिलना चाहिए। लेकिन ठेकेदारों द्वारा मजदूरी का भुगतान भी तीन-तीन माह के अंतराल से किया जा रहा है। उसमें भी वेतन का लगभग 70 फ़ीसदी हिस्सा ठेकेदार के लोग मजदूरों से वापस ले लेते हैं। इसी के विरोध में ठेका मजदूर महाप्रबंधक कार्यालय पाथाखेड़ा के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। धरने पर बैठे मजदूरों में बाबूलाल भारती, सत्यवान मंडल, धर्मेंद्र चौरे, अजय चौधरी, बलराम देशमुख, कृष्ण राम भारती, प्रहलाद पवार, सुग्रीव, लिखीराम, राजा प्रजापति, अभिषेक बिहारे समेत अन्य लोग शामिल है।

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