नई दिल्ली | कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से जमी कूटनीतिक बर्फ के पिघलने का स्पष्ट संकेत है। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में आई कड़वाहट को पीछे छोड़ते हुए कार्नी का यह दौरा व्यापार और निवेश के नए आयाम तलाशने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे कड़े टैरिफ के दबाव के बीच, कनाडा अब अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारत जैसे विशाल बाजार की ओर देख रहा है। यह यात्रा सामरिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टिकोणों से एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी को भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई पहुँचेंगे, जहाँ वे दो दिनों तक देश के दिग्गज उद्योगपतियों और कनाडाई पेंशन फंड्स के प्रतिनिधियों के साथ निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इसके बाद, 1 मार्च को वे दिल्ली पहुँचेंगे और 2 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इस द्विपक्षीय वार्ता में ट्रेड, एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और रिसर्च जैसे गंभीर मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद है। दोनों नेताओं का मुख्य उद्देश्य उन व्यापारिक आंकड़ों को फिर से ऊंचाई पर ले जाना है, जिनमें पिछले वित्त वर्ष के दौरान मामूली गिरावट देखी गई थी।
अमेरिका और कनाडा के बीच स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो सेक्टर में चल रहे टैरिफ वॉर ने कनाडा को नए सहयोगियों की तलाश के लिए मजबूर कर दिया है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-कनाडा व्यापार 8.4 अरब डॉलर रहा था, और अब कार्नी इसे भारत के साथ ‘सुरक्षित विकल्प’ के रूप में और मजबूत करना चाहते हैं। भारत की ओर से रत्न, ज्वेलरी और फार्मा उत्पादों का निर्यात होता है, जबकि कनाडा से पोटाश और इंडस्ट्रियल केमिकल भारत आते हैं। कार्नी की यह यात्रा दिखाती है कि कनाडाई नेतृत्व अब पुरानी कड़वाहट को भूलकर आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता के लिए भारत के साथ हाथ मिलाने को तैयार है।

