नरसिंहगढ़: मिनी कश्मीर के नाम से विख्यात नरसिंहगढ़ नगर मेंं 14 साल बाद एक बार फिर नरसिंहगढ़ महोत्सव के आयोजन को लेकर रणनीति बन रही है.क्षेत्र की धार्मिक, ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने, यहां के पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक बार फिर शहर में नरसिंहगढ़ महोत्सव सांस्कृतिक आयोजन की सुगबुगाहट तेज हो गई है.शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर पर्यटन गतिविधियों की समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टर डॉ गिरीश मिश्रा ने आगामी समय में इसे आयोजित किए जाने के निर्देश दिए है.
ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही महोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा. इसको लेकर विधायक मोहन शर्मा ने विधानसभा की प्रादेशिक कार्ययोजना में भी इसकी मांग को प्रमुखता से शामिल करते हुए इसको लेकर विधानसभा याचिका भी लगाई थी. वहीं उन्होने बीते वर्ष शहर आये मुख्यमंत्री से भी इसे आयोजित किए जाने की मांग की थी. इन्ही मांगो पर अब शासन की मुहर लग चुकी है और आने वाले दिनो में यह आयोजन सम्पन्न किए जाने का रास्ता भी साफ हो चुका है.
दो बार आयोजित हो चुका है महोत्सव
नगर में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए नरिंसंहगढ़ महोत्सव की पहल वर्तमान विधायक मोहन शर्मा के पिछले कार्यकाल के दौरान हुई थी. इस दौरान वर्ष 2010 और 2012 में दो बार यह आयोजन हुआ. जिसकी शुरूआत तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई थी.
स्थानीय लोक कलाओं को मिलेगा बढ़ावा
दो बार हुए आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने जहां अपनी प्रस्तुतियां दी थी. वहीं दूसरी और स्थानीय लोक कलाओंं का भी बेहतर प्रदर्शन हुआ था. इससे स्थानीय लोक कलाओं को बढ़ावा मिलेगा. उस दौरान महोत्सव के बाद ही यहां के पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 4 करोड़ की राशि से यहां कार्य हुए थे. बाद में यह आयोजन आगे नहीं के वर्षो में नहीं हो सका.
पर्यटन को विकास की दरकार
नरसिंहगढ़ क्षेत्र पर्यटन से समृद्ध है लेकिन आज इन्हे संवारे जाने की जरूरत है. विंध्य की सुरम्य पहाडिय़ों से घिरे क्षेत्र में कल-कल कर बहते झरने, ऐतिहासिक किला, जल मंदिर, सांका श्याम जी मंदिर, सौलह खंभ, करोटिया गुफा, बड़ी हनुमान गढ़ी, बाबा बैजनाथ महादेव, छोटा महादेव सहित अभयारण्य यहां की पहचान है, लेकिन इन्हे संरक्षण की महती आवश्यकता है. ऐसे में नरिंसंहगढ़ महोत्सव जेसे आयोजन इनके संरक्षण और विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे
