मोदी के विजन में बना स्पोर्ट्स का शानदार ईको सिस्टम : योगी

गोरखपुर, 21 मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश और देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले 11-12 वर्षों में स्पोर्ट्स का शानदार ईको सिस्टम विकसित हुआ है।

योगी ने गुरुवार को गोरखपुर के रामगढ़ताल में रोइंग फेडरेशन आफ इंडिया की तरफ से आयोजित 46वीं जूनियर नेशनल रोइंग चौंपियनशिप के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास हुआ है तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रोत्साहन के लिए सरकार हर कदम तत्परता से खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में विकसित हुए बेहतरीन ईको सिस्टम का ही परिणाम रामगढ़ झील (रामगढ़ताल) भी है। 2017 के पहले जो रामगढ़ताल गंदगी और अपराध का गढ़ था, वहां आज रोइंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ एशियाड की तैयारी के लिए राष्ट्रीय महिला टीम की प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन संभव हुआ है।

उन्होंने 20 राज्यों से आए रोइंग खिलाड़ियों की सहभागिता वाली इस प्रतियोगिता के समापन अवसर पर कहा कि 2017 के पहले की स्थिति में जिस रामगढ़ताल की तरफ कोई आना पसंद नहीं करता था, वहां रोइंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं युवाओं के भविष्य को संवारने के काम आ रही हैं। ताल का यही सही उपयोग है जहां से युवा अपने सामर्थ्य को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।

योगी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अपनी ऊर्जा व शक्ति का सही दिशा में सकारात्मक उपयोग कर रहा हो, उस देश का भविष्य उज्ज्वल होता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी हमेशा सकारात्मक सोच और टीम भावना के साथ कार्य करता है। वह नशा और नकारात्मकता से दूर रहकर, स्व अनुशासन के साथ समाज को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ता है।

योगी ने कहा कि जब वह यहां मुकाबला देख रहे थे तब ताल में खिलाड़ियों के सामने तेज हवाओं को देखकर उनके मन में महान साहित्यकार सोहनलाल द्विवेदी की पंक्तियां याद आ गईं। उन्होंने कहा था, ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जीवन का सच है कि जो डर गया वह मर गया। जो भाग गया उसको समाज, देश और ईश्वर भी कभी माफ नहीं करते हैं। इसीलिए, जीवन का एक ही मंत्र है और वह है ‘चरैवेति-चरैवेति’ का। यानी चलते रहो, चलते रहो। सम और विषम परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए अपने आप को तैयार करते रहो। भारतीय मनीषा ने भी सदैव यही प्रेरणा दी है।

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