स्नान और दर्शन स्थल तक श्रद्धालुओं को पहुंचाना सरकार के लिए बना चुनौती

उज्जैन: बीते सिंहस्थ 2016 से अनुभव लेकर आने वाले महाकुंभ 2028 की तैयारी जिस तरह से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर में की जा रही है ऐसे में सरकार दो विषयों को लेकर चिंतित है एक तो ट्रैफिक को संतुलित बनाना ताकि आम जनता, स्थानीय रहवासी और बाहर से आने वाले श्रद्धालु साधु संत परेशान ना हो, वहीं स्नान के लिए मोक्षदायनी मां शिप्रा के घाटों से लेकर दर्शनीय स्थलों तक श्रद्धालुओं को पहुंचाना है, जिसको लेकर अब स्थानीय पर अफसरो ने ताकत झोंक दी है.

सिंहस्थ 2028 को लेकर अब तैयारियां कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने लगी हैं. प्रशासनिक अमला लगातार मंथन में जुटा है ताकि आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से लेकर घाट तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो. योजना के मुताबिक शहर के बाहर ही अलग-अलग जोन में पार्किंग तैयार की जाएगी. इन्हें तीन स्तरों में बांटने की तैयारी है, ताकि भीड़ का दबाव एक जगह न पड़े. कोशिश यह रहेगी कि घाटों से पार्किंग की दूरी ज्यादा न हो और पैदल या शटल व्यवस्था से लोग आसानी से पहुंच सकें.

करोड़ों श्रद्धालु ,लाखों वाहन
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि महाकुंभ में जो श्रद्धालुओं आएंगे उनकी संख्या 30 करोड़ आंकी गई है ऐसे में लाखों वाहनों को पार्किंग में समायोजित करने के हिसाब से जगह चिन्हित की जा रही है. इंदौर, देवास, बड़नगर, बदनावर, आगर, मक्सी और गरोठ की ओर से आने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, इन्हीं रास्तों से सबसे ज्यादा ट्रैफिक आने की संभावना है.

हाईवे और बायपास पर नजर
अफसरों की रणनीति यह है कि फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों के आसपास बड़े पार्किंग जोन विकसित किए जाएं, ताकि शहर के अंदर वाहनों का दबाव कम रहे. पार्किंग स्थलों पर पेयजल, शौचालय, रोशनी और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की तैयारी है.

पिछली बार बहुत भटकना पड़ा
वर्ष 2016 के सिंहस्थ में श्रद्धालुओं लोगों को बहुत भटकना पड़ा ,ऐसे में पिछले कुंभ आयोजन के अनुभव को देखते हुए इस बार यह कोशिश की जा रही है कि वाहन खड़े करने के बाद श्रद्धालुओं को ज्यादा भटकना न पड़े. घाट तक जाने के लिए पक्के रास्ते और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग भी तैयार किए जाएंगे.

जाम से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते
नवभारत से चर्चा चर्चा में संभाग आयुक्त व सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि मार्गों के साथ-साथ वैकल्पिक रूट पहले से तैयार रखे जाएंगे. ऐसा प्लान है, कुछ स्थानों पर अंडरपास और कनेक्टिंग रोड विकसित करने की भी योजना है, ताकि एक ही दिशा में ट्रैफिक का दबाव न बने।देवास और इंदौर मार्ग के बीच अतिरिक्त संपर्क मार्ग विकसित करने पर विचार हुआ है. इसी तरह बड़नगर और अन्य एंट्री पॉइंट से आने वाले वाहनों को अलग-अलग जोन में डायवर्ट करने की रूपरेखा बनाई जा रही है.

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