
बीना। शहर में महापुरुषों और सांकेतिक स्थलों का राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों द्वारा प्रचार स्थलों के रूप में उपयोग किया जा रहा है, लेकिन शासन इस पर मौन है।जिन महापुरुषों की लोग शपथ लेकर आगे बढ़ते हैं उन्हें ही अपने प्रचार के माध्यम से महापुरुषों की मूर्तियों के आगे बोर्ड लगाकर उन्हें ढक देते हैं।उनकी जन्म जयंती एवं कार्यक्रमों के दौरान जरूर उनकी शपथ ली जाती है उनके मार्गदर्शन बताए जाते हैं किंतु उन पर खुद ना चल कर उन्हें केवल अपना प्रचार का माध्यम बना रहे हैं।अंबेडकर चौराहा से गांधी चौराहा एवं स्टेशन रोड के बीच में जो डिवाइडर बने है विद्युत पोलों का उपयोग होर्डिंग लगाने में किया जा रहा है जबकि नगर पालिका प्रशासन से इसकी अनुमति लेना चाहिए जिसकी विधिवत रसीद भी काटी जाती है।ज्ञात हुआ है किया की विज्ञापन के बोर्ड हेतु ठीक का एडवरटाइजिंग कंपनी को दिया गया है क्या डिवाइडर के बीच वृक्षों पर और महापुरुषों को ढंकना उचित है। सत्ता दल एवं विपक्षी दल द्वारा ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है इस तरह व्यवस्था बिगड़ना उचित है।सांकेतिक बोर्ड का हो रहा दुरुपयोग यहां तक की आवागमन एवं बाहरी यात्रियों के लिए जो सांकेतिक बोर्ड लगाए जाते हैं उनके ऊपर बड़े-बड़े होडिंग रखकर उन्हें ढक देते हैं सांकेतिक चिन्ह ना दिखने पर यात्रीगण आम नागरिकों से रास्ता पूछते हैं क्या यह न्याय संगत है दूसरों को मार्गदर्शन देने वाले जब खुद नियमों का उल्लंघन करें तो फिर इसे क्या कहेंगे।नगर पालिका,प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस विभाग भी इस पर आपत्ति नहीं उठाती है।
