
सीधी। भगवान श्रीद्वारिकाधीश के परम भक्त नरसी मेहता के भक्त चरित्र का मनमोहक मंचन श्रीरामकृष्ण लीला प्रचार मंडल वृन्दावन के रसिक कलाकारों व्दारा किया गया।
शहर के उर्मिलेश्वर धाम तिलक नगर पडऱा में 17 फरवरी से परम पूज्य दण्डी स्वामी निर्भायानंद सरस्वती के सानिध्य में वरिष्ठ समाजसेवी विनय कुमार सिंह परिहार के सौजन्य से आयोजित हो रहा है। मंगलवार को रासलीला का शुभारंभ श्रीराधाकृष्ण की निकुंज लीला से किया गया। डां अनूप मिश्रा, सीए राकेश शुक्ला मान्या पाण्डेय राष्ट्रीय लोक गायिका गुरुदत्त शुक्ला एम पी शुक्ला कुशाग्र त्रिपाठी ज्ञानेंद्र सिंह विमल सिंह दिलीप सितानी, डां. हरिओम सिंह अखिलेश पाण्डेय श्रीमती आराधना पाण्डेय पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनय कुमार सिंह ने अपनी माता एवं परिवार के साथ श्री युगल सरकार की आरती की।
परम भक्त नरसी मेहता बचपन से ही भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपना सारा समय कीर्तन में बिताया और सांसारिक मोह-माया से दूर रहे।
उनकी घर के कामकाज में रुचि न होने और कमाने की अनिच्छा के कारण, उन्हें अपने भाई और भाभी के ताने सुनने पड़ते थे।
जब नरसी मेहता की बेटी कुंवरबाई का भात (विवाह के समय माईरा) भरने की बात आई, तो कहा जाता है कि स्वयं कृष्ण ने एक सेठ के रूप में आकर भात भरा और उनकी लाज बचाई। इसी तरह नरसी जी ने एक बार द्वारका की यात्रा के लिए अपनी हुंडी (बैंक ड्राफ्ट) स्वयं भगवान कृष्ण के नाम पर 56 करोड़ की संपत्ति के बदले लिखी, जिसे भगवान ने स्वीकार किया। जब लोगों ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उन्हें राजा के सामने खड़ा किया, तो कृष्ण ने स्वयं आकर उनके गले में फूलों की माला डाल दी।
भक्त नरसी मेहता गुजरात के जूनागढ़ के एक महान कृष्णभक्त कवि थे, जिन्होंने अपना जीवन भजन-कीर्तन में समर्पित कर दिया। उन्होंने जातीय भेदभाव छोड़कर ‘हरिजन’ बस्तियों में कीर्तन किया, जिससे उन्हें समाज के बहिष्कार का सामना करना पड़ा। उनके प्रसिद्ध भजन ‘वैष्णव जन तो तैणे कहिए’ ने उन्हें घर-घर लोकप्रिय बनाया।
उक्त रासलीला में ठाकुर जी श्रीकृष्ण की भूमिका दीपेश शर्मा, श्री जी की भूमिका गोविंद शर्मा, श्री जी की अष्ट सखियों की भूमिका में करण शर्मा, नैतिक शर्मा, रवि शर्मा, राजू शर्मा, देव कुमार शर्मा, रामवीर शर्मा ने मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके साथ ही कान्हा जी दिगंबर शर्मा, हरीष शर्मा, छोटू मिश्रा, ऋषि मिश्रा द्वारा अभिनय किया गया।
