यरूशलेम | मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को इजरायल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। बेनेट के अनुसार, तुर्की, कतर और पाकिस्तान मिलकर एक नई ‘इस्लामिक धुरी’ बना रहे हैं, जो इजरायल के खिलाफ मोर्चेबंदी कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर संभावित कार्रवाई के बाद, इजरायल अब अपना ध्यान पाकिस्तान के “इस्लामिक बम” की ओर केंद्रित कर रहा है, क्योंकि यह परमाणु शक्ति संपन्न एकमात्र मुस्लिम देश है जो कट्टरपंथी ताकतों के साथ गठबंधन कर सकता है।
इजरायल को सबसे बड़ा डर उस प्रस्तावित ‘इस्लामिक नाटो’ से है, जिसमें पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों के शामिल होने की चर्चा है। बेनेट ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को एक खतरनाक दुश्मन करार देते हुए कहा कि वे मुस्लिम ब्रदरहुड के माध्यम से इजरायल को चारों ओर से घेरने की साजिश रच रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इस गठबंधन को पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का समर्थन प्राप्त हो सकता है। इजरायल इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से भी अधिक विनाशकारी मानता है, क्योंकि पाकिस्तान के पास पहले से ही लंबी दूरी की मिसाइलें और परमाणु आयुध मौजूद हैं।
मिडल ईस्ट में अमेरिका का सैन्य जमावड़ा 2003 के इराक युद्ध के बाद अपने उच्चतम स्तर पर है, जो किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई का संकेत दे रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान को चेतावनी और इजरायल के पाकिस्तान पर कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान अक्सर अपने विरोधियों के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देता रहा है, जिसे इजरायल अब हल्के में लेने के मूड में नहीं है। दुनिया को डर है कि यदि इजरायल ने अपनी सुरक्षा के लिए पाकिस्तान या तुर्की के खिलाफ कोई कदम उठाया, तो यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो सकती है।

