भारत के बिल्डिंग मटेरियल मार्केट में आएगा जबरदस्त उछाल, 2030 तक 100 अरब डॉलर का होगा कारोबार, रियल एस्टेट और लाइफस्टाइल में बदलाव से बदलेगी सूरत

नई दिल्ली | भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के बीच देश का भवन निर्माण सामग्री (बिल्डिंग मटेरियल) बाजार एक नई ऊंचाई छूने को तैयार है। एवेंडस कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक यह बाजार लगभग दोगुना होकर 100 अरब डॉलर के आंकड़े तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में 57 अरब डॉलर के इस बाजार में अगले पांच वर्षों के दौरान 10 से 12 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण की तेज रफ्तार और सरकार की ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ जैसी नीतियों ने इस क्षेत्र को जबरदस्त गति प्रदान की है।

रिपोर्ट में कुछ खास सेगमेंट को इस विकास का मुख्य आधार बताया गया है। फर्नीचर फिटिंग्स और हार्डवेयर का कारोबार 2030 तक 500 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसे सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनाता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिकल गुड्स (FMEG), विशेषकर डेटा सेंटर और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल होने वाले केबल की मांग में भी भारी उछाल देखा जा रहा है। वहीं, टाइल्स और बाथवेयर के क्षेत्र में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी अब 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती धाक को दर्शाता है।

आधुनिक उपभोक्ता अब घरों को केवल बुनियादी जरूरत नहीं, बल्कि ‘लाइफस्टाइल एसेट’ के रूप में देख रहे हैं, जिससे ब्रांडेड और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग बढ़ी है। इसके साथ ही पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने ‘ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल’ के बाजार को भी चमका दिया है, जिसके 2030 तक 26.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। एवेंडस कैपिटल के प्रबंध निदेशक कौशिक भट्टाचार्य का कहना है कि भारत में प्रति व्यक्ति खपत वैश्विक मानकों से अभी भी कम है, जिसका अर्थ है कि आने वाले दशक में इस उद्योग में विस्तार की अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं।

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