वॉशिंगटन | भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापारिक सुलह के दावों के बीच ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सौर ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनलों पर 125.87% की शुरुआती ‘काउंटरवेलिंग ड्यूटी’ (CVD) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिका का तर्क है कि भारत सरकार अपनी घरेलू कंपनियों को अनुचित सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस फैसले के बाद अब भारतीय सोलर उत्पादों की कीमतें अमेरिकी बाजार में दोगुनी से अधिक हो जाएंगी, जिससे उनकी मांग गिरने की आशंका है।
निर्यात पर पड़ेगा सीधा असर
सिटी के विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी-भरकम टैक्स के कारण भारतीय सौर कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार के रास्ते लगभग बंद हो सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भारत ने अमेरिका को करीब $792.6 मिलियन के सोलर उत्पादों का निर्यात किया था, जो 2022 के मुकाबले 9 गुना अधिक था। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत न केवल भारत, बल्कि इंडोनेशिया और लाओस जैसे देशों पर भी इसी तरह के सख्त टैरिफ लगाए गए हैं। यह कदम सीधे तौर पर ‘एलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग’ की शिकायत पर उठाया गया है, जिसमें फर्स्ट सोलर जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियां शामिल हैं।
निवेशकों और कंपनियों में मची खलबली
इस फैसले ने वारी एनर्जीज (Waaree Energies), अडानी ग्रीन और टाटा पावर जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों की विस्तार योजनाओं पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इन कंपनियों के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी निर्यात पर निर्भर था, जिसके चलते अब शेयर बाजार में इन सेक्टर्स के प्रति निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते के ठीक बाद हुई है। अब भारतीय उद्योग जगत की नजरें भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर सुलझाया जा सकेगा।

