गुना: नगर पालिका परिषद गुना में सोमवार को उस समय हड़कंच मच गया, जब बहाली की मांग को लेकर भटक रहे एक संविदा कर्मचारी ने कार्यालय के भीतर ही मच्छर मारने वाली दवा आॅल आउट पी ली। आनन-फानन में कर्मचारी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका उपचार जारी है।पूरा मामला नगर पालिका के वाहन चालक करण मालवीय से जुड़ा है, जो पिछले 8 वर्षों से संविदा पर कार्यरत था। करण के मुताबिक करीब 6 महीने पहले एक आदेश वायरल हुआ था, जिसमें तत्कालीन सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर थे।
इसी आधार पर करण सहित 7 कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया था। बाद में जांच में सामने आया कि इसमें कर्मचारियों की गलती नहीं थी। इसके बावजूद, प्रशासन ने 5 स्थाई कर्मचारियों को तो वापस काम पर रख लिया, लेकिन करण सहित 2 संविदा कर्मचारी अभी भी बेरोजगार हैं।पीड़ित करण का आरोप है कि वह बहाली के लिए लगातार गुहार लगाता रहा। इसी आश्वासन के बीच उसे दिसंबर और जनवरी महीने में रैन बसेरा में ड्यूटी पर रखा गया, लेकिन दो महीने काम कराने के बाद भी उसे वेतन का भुगतान नहीं किया गया। करण का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण उसके घर का गुजारा मुश्किल हो गया है और उसकी एक साल की छोटी बच्ची के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
करण के अनुसार, वह सोमवार को अपनी व्यथा सुनाने और आवेदन देने सीएमओ मंजूषा खत्री के पास गया था। आरोप है कि सीएमओ ने उसका आवेदन लेने से साफ मना कर दिया और उसे एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देकर कार्यालय से भगा दिया। इसी उपेक्षा और मानसिक तनाव से तंग आकर करण ने कार्यालय परिसर में ही आत्मघाती कदम उठा लिया।
कार्यालय में कर्मचारी द्वारा जहर सेवन की खबर फैलते ही अधिकारी और कर्मचारी दंग रह गए। फिलहाल पीड़ित का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इस संवेदनशील मामले में अब तक नगर पालिका के उच्चाधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
