नयी दिल्ली, 23 फरवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने तिरुपति मंदिर के लड्डुओं के घी में मिलावट की जांच के लिए एक-सदस्यीय जांच समिति बनाने के आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने डॉ सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि अगर राज्य समानांतर रूप से जांच करता है तो शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की आपराधिक जांच में खलल पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दोनों ही प्रक्रियाएं कानून के हिसाब से चलती रहनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी हो गयी है और राज्य की प्रशासनिक जांच से उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जनवरी में प्रस्तुत कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, लड्डू में जानवरों की चर्बी नहीं थी लेकिन खरीद प्रक्रिया में अन्य अनियमितताएं थीं जिससे मंदिर तक नकली घी पहुंच रहा था।
आंध्र सरकार ने हाल ही में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अगुवाई में एक-सदस्यीय समिति गठित की थी। इस समिति का काम एसआईटी के नोट की जांच करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की सलाह देना था।
