ग्वालियर: प्रदेश में 2 मार्च से यात्री बस हड़ताल होने जा रही है. इसमें सुबह 6 बजे से प्रदेश भर की 6000 यात्री बसों के पहिए अनिश्चितकाल के लिए ठहर जाएंगे. इससे लाखों यात्री प्रभावित होंगे. प्रदेश सरकार की परिवहन नीति के खिलाफ प्रदेश बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने सागर की धरती से ऐलान कर दिया है. लेकिन, इसके पहले अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर ग्वालियर चंबल अंचल में जिला स्तर पर आज सोमवार सुबह से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जा रहे हैं. सरकार के लिए करीब एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है कि वह यात्री बसों पर बनाए गए टैक्स को वापस ले और साथ ही जो नई परिवहन नीति अप्रैल 2026 से लागू करने वाली है उसको भी निरस्त करें.
मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने बताया कि सरकार 20 साल बाद परिवहन सेवा दोबारा शुरू करने जा रही है. प्रदेश की जनता को सस्ते में बेहतर सफर उपलब्ध कराने की दावा कर रही है. लेकिन, सरकार के पास अब कोई बस बची ही नहीं है. वह यह सेवा 7 प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर लागू करने जा रही है, जिसमें प्राइवेट बस ऑपरेटर से अनुबंध किया जा रहा है. चार या पांच रुपये किलोमीटर के अनुसार अनुबंध होगा. इसमें 18% अनुबंध करने वाली कंपनी लगी हैं. 10 प्रतिशत रेड बस वाले लेंगे. अभी यात्रियों के लिए प्रति 1 किलोमीटर 1.25 रुपये का किराया लगता है, लेकिन सरकार की नीति में यह किराया प्रति एक किलोमीटर 1.75 रुपये हो जाएगा. इससे आम जनता को भी नुकसान होगा. इससे सरकार का उद्देश्य बस मालिकों को किराएदार बनाकर उनका शोषण करना है.
