ओटावा | कनाडा की प्रमुख खुफिया एजेंसी ‘कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस’ (CSIS) ने अपनी वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा घोषित किया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये समूह कनाडा के भीतर अपने “हिंसक चरमपंथी एजेंडे” को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय संस्थानों और संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, कुछ चरमपंथी तत्व आम नागरिकों और भोले-भाले समुदाय के सदस्यों से धन जुटाते हैं, जिसका उपयोग बाद में हिंसक गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। यह रिपोर्ट कनाडा और भारत के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खुफिया एजेंसी ने एअर इंडिया उड़ान संख्या 182 (कनिष्क विमान कांड) की बरसी का संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा किया गया वह बम विस्फोट आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है, जिसमें 329 बेगुनाह लोगों की जान गई थी। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय रखना उग्रवाद नहीं है, लेकिन मुट्ठी भर लोग जो कनाडा की धरती का उपयोग भारत में हिंसा फैलाने और साजिश रचने के लिए कर रहे हैं, वे सीधे तौर पर चरमपंथ की श्रेणी में आते हैं। भारत सरकार पहले ही ऐसे कई संगठनों को आतंकवादी समूहों की सूची में डाल चुकी है।
पिछले कुछ वर्षों में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के रिश्तों में जो खटास आई थी, वह अब धीरे-धीरे कम होती दिख रही है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली नई सरकार के कार्यकाल में दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। कनाडा की धरती से संचालित होने वाले अलगाववादी आंदोलनों पर खुफिया एजेंसी की यह सख्त टिप्पणी भारत के उस रुख की पुष्टि करती है, जिसमें वह लंबे समय से कनाडा को अपनी धरती पर पनप रहे भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी देता रहा है। इस रिपोर्ट के बाद चरमपंथी समूहों पर कड़े प्रतिबंधों की उम्मीद जताई जा रही है।

