चिकित्सालय परिसर में कोतवाल का आदेश भी हुआ बेअसर

सतना : जिला चिकित्सालय परिसर से लेकर वार्डों तक सीधा दखल देते हुए मरीज के परिजनों को बरगला कर उन्हें निजी क्लीनिक-अस्पताल ले जाकर दलाली वसूलने के लिए कुख्यात निजी एंबुलेंस संचालकों पर रोक लगाने के मामले में न सिर्फ अस्पताल प्रशासन बल्कि पुलिस प्रशासन भी बेबस ही नजर आता है. हलांकि हनक बनाए रखने के लिए मुख्य गेट पर आदेश जरुर चस्पा करा दिया गया है. लेकिन उसका असर कितना हो रहा है इसकी तस्दीक परिसर में एंबुलेंस संचालकों की बनी रहने वाली मौजूदगी को देखकर आसानी से की जा सकती है.

जिला कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम सिटी द्वारा जिला चिकित्सालय परिसर में निजी एंबुलेंस संचालकों की अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने का काफी प्रयास किया जा चुका है. यहां तक कि परिसर और निकट के क्षेत्र से एंबुलेंस संचालकों को खदेड़ते हुए पहले सहकारी बैंक के पास और फिर उसके बाद पुराने पेट्रोलियम डिपो की ओर भेज दिया गया था. लेकिन हुआ यह कि हर बार खदेड़े जाने के कुछ दिनों बाद ही निजी एंबुलेंस संचालक वापस अस्पताल परिसर और आस-पास डेरा जमाने लगे. जबकि इस दौरान दलाली में दखल से नाराज कुछ निजी एंबुलेंस संचालकों द्वारा अस्पताल कर्मियों और सुरक्षा गार्डों को खुलेआम धमकाने से भी परहेज नहीं किया गया.

लिहाजा कुछ दिनों तक कड़ाई करने के बाद प्रशासन द्वारा मामले को छोड़ दिया गया. जिसके चलते एक बार फिर से अस्पताल के वार्डों तक निजी एंबुलेंस संचालकों की धमाचौकड़ी शुरु हो गई. इतना ही नहीं बल्कि इस मामले में अस्पताल चौकी में पदस्थ स्टॉफ द्वारा कुछ निजी एंबुलेंस संचालकों को शह देने के गंभीर आरोप भी सामने आने लगे. लिहाजा अमले की फजीजत बढ़ती देख कोतवाल साहब सक्रिय हो गए और मातहत अमले से सवाल जवाब किया जाने लगा. इसी कड़ी में अस्पताल के मुख्य गेट पर कोतवाल का एक आदेश चस्ता कर दिया गया. जिसके जरिए अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस संचालकों के प्रवेश का प्रतिबंधित कर दिया गया. आलम यह रहा कि आदेश को और पुख्ता बनाने के लिए उसे फाडक़र दूसरा सील सिक्का वाला आदेश भी चस्पा कर दिया गया. लेकिन इस बार भी वही हुआ जो अब होता आ रहा था. कुछ दिन की लुकाछिपी के बाद निजी एंबुलेंस संचालकों का परिसर में मंडराना शुरु हो गया.
 पिछला गेट बना रास्ता
बदली हुई व्यवस्था के चलते निजी एंबुलेंस संचालकों ने सामने के गेट से प्रवेश करने के बजाए अब पिछले रास्ते से प्रवेश करना शुरु कर दिया है. अस्पताल के पिछले गेट से प्रवेश कर हर रोज 3-4 एंबुलेंस मर्चुरी के पास खड़ी हो जाती हैं. वहीं टीवी वार्ड के बगल से बने रास्ते के जरिए निजी एंबुलेंस कर्मी अस्पताल के वार्डों तक पहुंच जाते हैं. जहां पर वे मरीज के परिजनों को बरगला कर निजी संस्थानों में ले जा रहे हैं. इतना ही नहीं बल्कि रात होते ही अस्पताल मार्ग पर आधा दर्जन से अधिक निजी एंबुलेंस आकर खड़ी हो जाती हैं. रात के दौरान मरीरज को निजी संस्थानों में ले जाने के बाद सुबह होने तक ये वहां से गायब हो जाती हैं. यहां तक कि रात में पुलिस गश्त के दौरान भी अस्पताल के मुख्य गेट के अगल बगल निजी एंबुलेंस की मौजूदगी के साथ संचालकों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा दिखाई देता है.

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