इंदौर: एमपीएफसी ने विभिन्न संस्थाओं से लिया 1050 करोड़ रुपए की देनदारी खत्म कर दी है. अब एमपीएफसी को अपने कर्जदारों से ढाई सौ करोड़ रुपए से ज्यादा कर्जदारों से वसूलना है, जो उसकी पूंजी है. खास बात यह है कि एमपीएफसी ने पिछले कई सालों से ऋण देना बंद कर दिया है.मध्य प्रदेश वित्त निगम ने हुडको, सीडबी और शासन से लिया 1050 करोड़ रुपए का ऋण भुगतान कर दिया है. इस पर वित्त निगम ने करीब 350 करोड़ रुपए से ज्यादा बयाज का भुगतान किया है.
प्रदेश के भोपाल, इंदौर और जबलपुर में मध्य प्रदेश वित्त निगम ने सैंकड़ों उद्योगपतियों को ऋण दिए है. वर्तमान स्थिति में मध्य प्रदेश वित्त निगम को अपने 296 बकायेदारों से 258 करोड़ रुपए लेना है, जो वित्त निगम की पूंजी है. पिछले साल वित्त निगम ने 65 करोड़ रुपए की वसूली की , जो कुल बकाया राशि का 23 प्रतिशत है. फिलहाल वित्त निगम का इंदौर में 60 कर्जदारों पर 87.45 करोड़ रुपए बकाया है। पूरे प्रदेश में कर्जदारों से सीज की गई प्रॉपर्टी अलग है. बताया जाता है वित्त निगम अब सिर्फ 60 अधिकारी और कर्मचारी बचे है.
वित्त निगम बंद करने की कवायद
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वित्त निगम को बंद करने चर्चा है। इसकी बजे यह बताई जा रही है कि उद्योग के लिए लोन तो ले लेते है, लेकिन भुगतान नहीं करते है। वित्त निगम का अभी भी बहुत पैसा बकाया है। यह बात अलग है कि वित्त निगम ने विभिन्न संस्थाओं से लिया लोन चुकता कर दिया है। इसकी पुष्टि इस बात से मानी जा सकती है कि पिछले 8 सालों से एमपीएफसी ने ऋण देना बंद कर दिया है। वहीं वित्त निगम में अधिकारी और कर्मचारियों की भर्ती भी नहीं की जा रही है। वित निगम अपनी सीज प्रॉपर्टी और बकाया वसूली होते ही या तो किसी अन्य संस्था में मर्ज कर दी जाएगी या फिर सरकार अपने अंडर टेकिंग कर निगम की संपत्तियों का मालिकाना हक ले लेगा.
