इंदौर: हीरानगर थाना क्षेत्र में निवेश के नाम पर करीब तीन करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) में पदस्थ एक अर्दली ने उसी संस्थान के चार नर्सिंग अधिकारियों को प्रॉपर्टी कारोबार में मोटे मुनाफे का झांसा देकर 2.92 करोड़ रुपये ऐंठ लिए. रकम पत्नी और मां के नाम संचालित फर्मों में लगाने का दावा किया, लेकिन न तो जमीन दिखाई गई और न ही पैसा वापस मिला. पुलिस ने मुख्य आरोपी के साथ उसकी पत्नी और मां को भी प्रकरण में सह-आरोपी बनाया है.
थाना प्रभारी सुशील पटेल ने बताया कि नर्सिंग अधिकारी नरेंद्र कुमार सागर, दयानंद बेनीवाल, अयुष दधीच और दलवीर प्रजापत की शिकायत पर दीपेश रायकवार, उसकी पत्नी आकांक्षा रायकवार और मां शीला रायकवार के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी. जांच में सामने आया कि दीपेश उसी विभाग में अर्दली था. उसने सहकर्मियों से नजदीकी बढ़ाई और खुद को प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त के बड़े कारोबार से जुड़ा बताकर निवेश पर ऊंचा मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया. आरोप है कि आरोपी ने ‘रायकवार ट्रेडर्स’ और ‘एकदंत’ नाम की फर्मों के जरिए पैसा निवेश करने की बात कही.
अधिकारियों ने बैंक से कर्ज लेकर जुटाई थी राशि
आरोपी ने पीड़ितों से 2 करोड़ 92 लाख रुपये अलग-अलग किश्तों में लिए, नरेंद्र कुमार सागर से 91 लाख, दयानंद बेनीवाल से 62 लाख, अयुष दधीच से 1.08 करोड़ और दलवीर प्रजापत से 91.38 लाख रुपये लिए. चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश रकम पीड़ितों ने बैंक से लोन लेकर जुटाई थी. जब उन्होंने निवेश का ब्यौरा मांगा तो आरोपी टालमटोल करता रहा.
फर्मों के बैंक खातों और लेनदेन का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब कथित फर्मों के बैंक खातों और लेनदेन का रिकॉर्ड खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि करोड़ों रुपये कहां स्थानांतरित किए. प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि रकम को किसी अन्य खाते में घुमाया तो नहीं गया. मामले में थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यदि रकम का दुरुपयोग सिद्ध होता है तो संपत्ति कुर्की (अस्थायी जब्ती) की कार्रवाई भी की जा सकती है.
