300 की क्षमता वाला ब्लड बैंक खाली होने की कगार पर: 40 यूनिट पर सिमटा जीवनरक्षक स्टॉक

छतरपुर। जिला अस्पताल छतरपुर स्थित एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक में रक्त की गंभीर कमी सामने आई है। 300 यूनिट की भंडारण क्षमता वाले इस ब्लड बैंक में अब तक मात्र 40 यूनिट रक्त उपलब्ध है। कई प्रमुख ब्लड ग्रुप जीवनरक्षक स्तर से नीचे पहुंच चुके हैं, जिससे ऑपरेशन और प्रसव जैसे आपात मामलों में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान ब्लड स्टॉक की स्थिति–

* बी पॉजिटिव – 11 यूनिट

* बी नेगेटिव – 03 यूनिट

* ओ पॉजिटिव – 09 यूनिट

* ओ नेगेटिव – 06 यूनिट

* ए पॉजिटिव – 04 यूनिट

* ए नेगेटिव – 03 यूनिट

* एबी पॉजिटिव – 02 यूनिट

* एबी नेगेटिव – 02 यूनिट

 

निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

हाल ही में जिले के कलेक्टर द्वारा ब्लड बैंक का निरीक्षण किया गया था, इसके बावजूद स्टॉक बढ़ाने की ठोस रणनीति जमीन पर नजर नहीं आ रही। ब्लड सेपरेशन यूनिट जैसी आधुनिक सुविधा होने के बावजूद रक्त का अकाल अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रहा है।

शोपीस बनी मोबाइल वैन, नहीं लग रहे शिविर

रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए खरीदी गई मोबाइल वैन अस्पताल परिसर में खड़ी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिविर लगाने या युवाओं को प्रेरित करने के प्रयास सीमित दिख रहे हैं। नियमित जागरूकता अभियान का अभाव भी संकट को बढ़ा रहा है।

जिले सहित आसपास के मरीज परेशान

छतरपुर ही नहीं, बल्कि महोबा, टीकमगढ़ और पन्ना से आने वाले मरीजों के परिजनों को भी भटकना पड़ रहा है। एक्सचेंज सिस्टम के तहत डोनर लाना अनिवार्य है, लेकिन कई परिजन रक्त लेने तो आते हैं, पर दान देने से हिचकिचाते हैं। ऐसे में निजी ब्लड बैंकों या बाहरी डोनरों पर निर्भरता बढ़ रही है।

क्या बोले सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने कहा कि रक्त की कमी दूर करने के लिए वैकल्पिक उपायों पर काम किया जा रहा है। जल्द ही जागरूकता अभियान और शिविर आयोजित कर स्टॉक बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

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