वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वहां की न्यायपालिका के बीच व्यापारिक युद्ध अब एक नए मोड़ पर आ गया है। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पिछले टैरिफ आदेशों को ‘अवैध’ घोषित कर रद्द कर दिया था, लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप ने मास्टरस्ट्रोक चलते हुए नए ग्लोबल टैरिफ का ऐलान कर दिया। व्हाइट हाउस के अनुसार, आगामी 24 फरवरी से दुनिया के तमाम देशों से आने वाले सामान पर 10 फीसदी का नया शुल्क प्रभावी होगा। ट्रंप ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के विरुद्ध बताया है।
अदालती बाधा को पार करने के लिए ट्रंप ने ‘ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122’ का सहारा लिया है। यह कानून राष्ट्रपति को विशेष शक्ति देता है कि यदि देश का ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ बिगड़ता है, तो वे बिना किसी लंबी जांच के 150 दिनों के लिए 15% तक का आयात शुल्क लगा सकते हैं। वर्तमान आदेश के तहत 10% का ग्लोबल सरचार्ज लगाया गया है, जो शुरुआती 5 महीनों के लिए वैध रहेगा। इसके बाद इस व्यवस्था को जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिससे वैश्विक बाजारों में खलबली मच गई है।
अदालत के फैसले से उम्मीद थी कि टैरिफ पुराने स्तर (भारत के लिए 3-4%) पर लौट आएंगे, लेकिन ट्रंप के नए आदेश ने समीकरण बदल दिए हैं। अब मौजूदा ड्यूटी के ऊपर 10% अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत जैसे मित्र देशों के साथ बातचीत के रास्ते खुले हैं। व्हाइट हाउस ने ‘फैक्ट शीट’ जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी कस्टम विभाग 24 फरवरी की आधी रात से नई दरों पर वसूली शुरू कर देगा। ट्रंप का यह कदम साफ संदेश है कि वे अदालती दखल के बावजूद अपनी व्यापारिक नीतियों से पीछे नहीं हटेंगे।

