50 करोड़ खर्च करने के बाद भी एमआर 11 सड़क अधूरी क्यों पड़ी है…?

इंदौर: शहर में मास्टर प्लान के सड़कों के निर्माण में बाधक नहीं हटाए जाने से अधूरी बनी हुई है. अधूरी सड़क का लाभ जनता को नहीं मिल रहा और आईडीए का पैसा भी फंस गया है. साढ़े तीन किलोमीटर लंबी सड़क में 1 किलोमीटर का हिस्सा बाहुबलियों और मंत्री की जिद में अटका हुआ है. 50 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी सड़क अधूरी है, क्योंकि निगम बाधक नही हटा रहा और बाहुबली रास्ता नहीं दे रहे हैं. वह भी उस स्थिति में जब आईडीए ने हाईकोर्ट में केवीएट लगा रखी है.

आईडीए द्वारा एबी रोड से बायपास तक साढ़े तीन किलोमीटर मास्टर प्लान की एमआर-11 सड़क बनाई जा रही है. उक्त मास्टर प्लान की सड़क बस्ती के कारण उलझी हुई है. सिर्फ 800 मीटर बस्ती का टुकड़ा नहीं बन पा रहा है. सड़क का बाकी हिस्सा दोनों तरफ से बन गया है। बीच में 237 मकानों की बस्ती है, जिसको हटाने के लिए आईडीए द्वारा नगर निगम को कई बार पत्र लिखे गए हैं. उक्त बस्ती को नहीं हटाने के कारण मास्टर प्लान की उक्त सड़क अधूरी पड़ी है.

मास्टर प्लान की यह सड़क 60 मीटर यानी 200 फीट चौड़ी है और इसका करीब 2.5 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा बन चुका है. उक्त सड़क की निर्माण लागत 73 करोड़ रुपए है. इसका ठेका हाइवे इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया गया है. 50 करोड़ रुपए का काम हो चुका है. उक्त सड़क पर यातायात शुरू होने से देवास नाका के ट्रांसपोर्ट व्यापारियों को राहत मिलेगी. आईडीए द्वारा एबी रोड से बायपास जाने आने के लिए नई सड़क मिलने से भारी वाहन का दबाव शहर में कम हो जाएगा.

बाधक हटाने की कोशिशः झाड़े
आईडीए सीईओ डॉ परीक्षित झाड़े ने कहा कि उक्त सड़क को पूरी करने के लिए बाधक हटाने की कार्रवाई करने के कोशिश कर रहे हैं.

सड़क में  237 बाधक है बस्ती के
एमआर 11 सड़क में एबी रोड से नाले तक 25 और पीपलियाकुमार की बस्ती के 212 कच्चे पक्के निर्माण बाधक है. उक्त बस्ती को आईडीए ने नगर निगम से कई बार पत्र लिखकर हटाने की कारवाई का कहा है, लेकिन निगम द्वारा बस्ती को हटाने की कारवाई अभी तक नहीं की गई है.

केवीएट लगाने के बावजूद सड़क निर्माण के बड़े बाधक बाहुबली और मंत्री

आईडीए की एमआर-11 सड़क निर्माण पूरा होने में सिर्फ बस्ती ही नहीं, कुछ कॉलोनाइजर भी है. सूत्रों के अनुसार एक बाहुबली कॉलोनाइजर ने आईडीए अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इधर घुसे तो ठीक नहीं होगा. उन्होंने सड़क का 150 मीटर हिस्सा बनने से रोका हुआ है और पुलिया का भी काम नहीं करने दे रहे है. वहीं एनआरके कॉलोनी ने आईडीए द्वारा हाईकोर्ट में केवीएट दायर करने बावजूद हाईकोर्ट से ही आदेश करा लिया है कि उनकी सुनवाई आईडीए अधिकारी की बजाय टीएनसीए के संचालक द्वारा की जाए.

उक्त आदेश आईडीए के केवीएट दायर करने के बाद हुआ है. इसके अलावा एमआर 11 सड़क में बाधक बस्ती के 237 मकान हटाने की करवाई कबीना मंत्री ने यह कह कर रुकवा राखी है कि मेरे 5 सौ वोटर है और मैं चुनाव हार जाऊंगा. आईडीए उक्त बस्ती के लोगों को पीएम (ए) आवास में शिफ्टिंग करने को तैयार है. उक्त समस्याओं और बाहुबलियों के कारण मास्टर प्लान की महत्वपूर्ण एमआर 11 सड़क अधूरी पड़ी है, जिसमें आईडीए का 50 करोड़ रुपए खर्च हो गया और जनता को लाभ नहीं मिल रहा है

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