
सागर। आचार्य श्री विद्यासागर की समाधि के बाद आचार्य श्री समय सागर के द्वारा पहली बार मुनि दीक्षा 19 फरवरी को हो रही है लाखों रुपए का पैकेज छोड़ा और वैराग्य के मार्ग पर चलने के लिए आतुर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर स्थित प्रसिद्ध जैन तीर्थक्षेत्र मुक्तागिरी जिला बैतूल में हो रही मुनि दीक्षा में 24 दीक्षाथियों में से पांच दीक्षार्थी सागर के निवासी हैं।
मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि वर्तमान में आचार्य संघ में ऐलक और छुल्लक महाराज के रूप में दीक्षित 23 साधु मुक्तागिरी में दीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। इनमें उच्च शिक्षित 2 सीए, 8 सॉफ्टवेयर इंजीनियर,1 प्रोफेसर, 1 कंपनी सेक्रेट्री, 2 एमबीए के अलावा लगभग सभी दीक्षार्थी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट है। सागर के एक दीक्षार्थी ने बीएसएनएल की सरकारी इंजीनियर की नौकरी छोड़ी, तो 8 सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, दो सीए, एक कंपनी सेक्रेट्री, 2 एमबीए शिक्षित वैराग्य के मार्ग पर चलने के लिए लाखों रुपए के पैकेज का वेतन और घर द्वार छोड़कर के मुनि दीक्षा लेने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर स्थित प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरी जिला बैतूल पहुंच चुके हैं। मुक्तागिरी की यह पावन भूमि 11 फरवरी 1998 को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के कर कमलों से 10 मुनि दीक्षाओं के साथ पवित्र हुई थी 27 वर्ष बाद पुनः आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर महाराज के कर कमलो से लगभग 24 मुनि दीक्षाएं होने जा रही हैं। इन 24 दीक्षा में पांच दीक्षार्थी सागर के रहने वाले हैं इनके अलावा इंदौर, गुना, जबलपुर, भोपाल, सतना,विदिशा, कटंगी, दमोह, गोटेगांव, गंजबासौदा, के अलावा फिरोजपुर पंजाब, फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश, वर्धा महाराष्ट्र, अमरावती महाराष्ट्र, सहारनपुर, पटना बिहार, आदि स्थानों के है। सभी दीक्षार्थियो के परिवारजन और रिश्तेदार सहित देशभर से लोग मुक्तागिरी पहुंच रहे हैं। बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया बंडा भी इन दीक्षार्थियों को विधि विधान से दीक्षित करने में सहयोगी बनेंगे।
