जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण के मामले में सुनवाई पूरी हो गई है। सभी पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण दिया गया कि हर विभाग में प्रमोशन के लिए कमेटी बनेगी। सरकार का कहना है कि कमेटी सुनिश्चित करेगी आरक्षण नियमों का पालन हो। सरकार ने यह भी कहा कि जो पूर्व में आरक्षित वर्ग के अनारक्षित वर्ग में पदोन्नति प्राप्त किए हैं, उनकी गणना उनके वर्ग में ही की जाएगी। एससी व एसटी का अर्थात 16 एवं 20 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट के द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिये। मामले में उभयपक्षों की बहस पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।
