नयी दिल्ली, 16 फरवरी (वार्ता) भारतीय निर्यातकों को अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत वहां पारस्परिक शुल्क की घटी हुई दरों के लागू होने के लिए मार्च तक इंतजार करना पड़ सकता है जबकि ट्रम्प सरकार ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत के दंडात्मक शुल्क को सात फरवरी को ही हटा लिया है। अमेरिका ने भारत के खिलाफ अगस्त 2025 में 25 प्रतिशत का परस्पर अनुवर्ती शुल्क लगाने के बाद रूस से तेल खरीदने को लेकर 50 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगा दिया था। इस तरह वहां भारतीय माल पर शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने यहां सोमवार को आयात-निर्यात की मासिक रिपोर्ट जारी करने के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि एक-दूसरे के माल पर शुल्क की परस्पर अनुवर्ती दरें लागू करने की दिशा में दोनों ओर से काम तेजी से चल रहा है। इस काम के लिए भारत के व्यापार वार्ताकारों का एक दल अगले सप्ताह वाशिंगटन जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानूनी दस्तावेज पर दोनों पक्षों की मुहर लगने के बाद ही भारत में अमेरिकी वस्तुओं को प्रवेश में रियायत दी जायेगी।
श्री अग्रवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा, “व्यापार सौदे की विस्तृत रूप रेखा को कानूनी दस्तावेज का रूप दिया जाना है। हमारा लक्ष्य इसे मार्च 2026 के अंत तक अंतिम रूप दे देना है।” उल्लेखनीय है कि व्यापार समझौते पर जारी संयुक्त घोषणा पत्र के आधार पर ही एक-दूसरे के माल पर शुल्कों में रियायत दी जानी है। वाणिज्य सचिव ने कहा, “संयुक्त घोषणा-पत्र के आधार पर अभी कानूनी दस्तावेज तैयार किया जाना है। इसमें कई बारीकियों को निपटाया जाना है।”
दोनों पक्ष पारस्परिक आधार पर तय 18 प्रतिशत या शून्य प्रतिशत आयात शुल्क की दरें लागू करने की औपचारिकताओं को पूरा करने में लगे हुए हैं और प्रयास है कि मार्च के अंत तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाए। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के साझा वक्तव्य को कानूनी दस्तावेज का रूप देने में लगने वाले समय के बारे में अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। श्री अग्रवाल ने बताया कि ब्रिटेन के साथ समझौतों को लागू करने की दिशा में अच्छी प्रगति हुई है और इस समझौते को इस साल अप्रैल तक अंतिम रूप दिया जा सकता है।
इस बीच, अमेरिकी कपास को शून्य शुल्क पर प्रवेश देने के मुद्दे पर वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, “भारत कपास का शुद्ध रूप से आयातक है। हम आज भी अमेरिका से सालाना 25 करोड़ डॉलर की कपास का आयात करते हैं। सेज इकाइयों और निर्यात के लिए विशेष लाइसेंस के आधार पर शुल्क मुक्त कपास का आयात किया जाता है जो मुख्यत: निर्यात माल तैयार करने के लिए होता है।” अधिकारियों ने कहा कि भारत-ईयू और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से घरेलू वस्त्र उद्योग के लिए करीब 400 अरब डॉलर का बड़ा बाजार मिलेगा जिसमें पहले की तुलना में प्रतिस्पर्धी शुल्क पर निर्यात किया जा सकेगा। उनका कहना है कि यदि भारत इस बाजार में अतिरिक्त 10 प्रतिशत हिस्सा ही हासिल कर ले तो कपास के बड़े आयात की जरूत होगी।
अधिकारियों ने कोई विस्तृत विवरण दिये बिना स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में केवल उन्हीं वस्तुओं के आयात पर सहमति दी है जिसका अन्य देशों से आज भी आयात किया जाता है। अमेरिका से समझौते में हर कृषि उत्पाद के लिए शुल्क आधारित आयात कोटा की व्यवस्था लागू की गयी है। nजेनिटकली मॉडीफाइड (जीएम) खाद्य (उत्पादों) को प्रवेश देने के बारे में एक अधिकारी ने कहा, “हमारे कुछ सुरक्षा नियम हैं, इसके लिए समितियां बैठी है।”
अमेरिका से पांच साल में 500 अरब डॉलर के आयात की प्रतिबद्धता के बारे में अधिकारी ने कहा, “अमेरिका ने भी स्पष्ट किया है कि यह एक इच्छा है।” उल्लेखनीय है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले भी कह चुके हैं कि ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र का व्यापार बढ़ने पर आयात पांच सौ अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है।
अमेरिका और यूरोप का द्विपक्षीय वाणिज्यिक वस्तु व्यापार 2024 में 129 अरब डॉलर के बराबर था और इसमें सेवा व्यापार को मिला दें तो यह आंकड़ा 212 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है। वस्तु व्यापार में व्यापार घाटा 45.8 अरब डॉलर से अमेरिका के प्रतिकूल था।

