इंदौर: वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर व्यापारिक जगत के एक बड़े वर्ग में असंतोष गहराता दिख रहा है. जीएसटी व्यवस्था, महंगाई और वरिष्ठ नागरिकों को राहत जैसे मुद्दों पर स्पष्ट समाधान न मिलने से नाराजगी खुलकर सामने आ रही है.वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश होने के बाद व्यापारिक समुदाय के एक बड़े तबके में निराशा देखी जा रही है. खास तौर पर, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को लेकर व्यापारी खुलकर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि कफन, श्मशान की लकड़ी, धूप और अगरबत्ती जैसी जीवन के अंतिम संस्कार से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी लगाया जाना संवेदनहीन निर्णय प्रतीत होता है. व्यापारियों का तर्क है कि ये वस्तुएं आम नागरिक की मूल जरूरत से जुड़ी हैं, जिन पर कर का बोझ नहीं होना चाहिए था.
इसके अलावा महंगाई पर ठोस नियंत्रण के लिए बजट में किसी प्रभावी कदम की घोषणा न होने से भी असंतोष बढ़ा है. बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के बीच आम उपभोक्ता और मध्यम वर्ग को राहत की उम्मीद थी, जो पूरी होती नजर नहीं आई. कई व्यापारियों ने बजट को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए इसे अपेक्षाओं से कमतर बताया. सीनियर सिटीजन के लिए भी किसी बड़ी कर छूट या विशेष आर्थिक राहत की घोषणा नहीं होने से वरिष्ठ नागरिकों में मायूसी है. कुल मिलाकर बजट 2026-27 को लेकर व्यापारी वर्ग स्पष्ट रूप से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा और आने वाले समय में इस मुद्दे पर संगठित प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है.
इनका कहना है
इस बार का जो बजट आया है, भैंस के आगे बीन बजाने के मुताबिक है. प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों के ऊपर कफन पर भी जीएसटी लगा दिया है. वस्त्र लकड़ी, धूप, अगरबत्ती जैसी वस्तुओं पर जीएसटी लगा दिया यह बिल्कुल गलत है.
– संजय अरोड़ा, अध्यक्ष, मप्र ट्रांसपोर्ट महासंघ
आम नागरिक चाहता है कि सरकार द्वारा बजट ऐसा हो, जिससे मध्य वर्ग को भी बड़ी राहत मिले. बजट में महंगाई कम करने को लेकर कोई बात नहीं हुई, जो कि अति आवश्यक थी. यह बजट कुल मिलाकर ऊंट के मुंह में जीरे के समान है.
– डॉ. सुमित आनंद, चेयरमैन, एंटी करप्शन फाउंडेशन
रेलवे में सीनियर सिटीजन के लिए कोई राहत नहीं दी गई. रेलवे में कहीं पर भी जाना हो, हमेशा 40 से ऊपर तक की वेटिंग आती है, फिर रेलवे कैसे नुकसान में चल रही है. यह कैसे संभव हो सकता है.
– जयप्रकाश मौर्य, व्यापारी
