म्युनिख, 14 फरवरी (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी के म्युनिख में शनिवार को एक परिचर्चा में कार्बन उत्सर्जन पर विकसित और विकासशील देशों के लिए अलग-अलग जिम्मेदार तय करने की मांग करते हुए कहा कि जिन देशों ने पहले कम उत्सर्जन किया है उन्हें ज्यादा उत्सर्जन करने वाले देशों के बराबर कीमत चुकाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
जर्मनी की यात्रा पर आयीं श्रीमती सीतारमण ने “धरती के बढ़ते तापमान के बीच जलवायु सुरक्षा” पर आयोजित एक परिचर्चा में कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि जिन देशों का उत्सर्जन में कम योगदान रहा है उन्हें भी बराबर कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जाये। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उपाय में भी सबका योगदान अलग-अलग तय करना होगा।”
उन्होंने कहा कि भारत ने इन उपायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ायी है। छह साल पहले इस मद में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.7 प्रतिशत खर्च किया जाता था, आज यह आंकड़ा बढ़कर 5.6 प्रतिशत पर पहुंच गया है। भारत ने बाहर से वित्तीय मदद या प्रौद्योगिकी का इंतजार किये बिना इसमें निवेश किया है।
वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश करता रहेगा और उस प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भी कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीतियों पर निवेश किया गया है ताकि पूरे देश में उन्हें लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में से दो-तिहाई को लक्षित समय से पहले हासिल कर लिया है।
इससे पहले म्यूनिख अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानीय भारतीय महावाणिज्य दूत शत्रु सिन्हा ने श्रीमती सीतारमण का स्वागत किया। यहां उनका म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और कई परिचर्चाओं में भाग लेने का कार्यक्रम है। वह विभिन्न देशों के मंत्रियों और बहुस्तरीय संगठनों के प्रमुखों से भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगी।
