बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में गौ कथा का दिव्य समापन, धर्म व गौ संरक्षण का संकल्प सुदृढ़

रीवा। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में स्थित श्री रेवासा धाम एवं श्री वृंदावन धाम के पावन सानिध्य में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज द्वारा आयोजित गौ कथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती विषयक दिव्य कथा का तीसरा एवं अंतिम दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ. बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ कथा श्रवण किया.

अपने अमृतमय प्रवचन में महाराज श्री ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पृथ्वी सात स्तंभों पर आधारित है. प्रथम स्तंभ गौ माता हैं, द्वितीय ब्राह्मण, तृतीय वेद, चतुर्थ सती-सावित्री पतिवृता नारियां, पंचम सत्यवादी पुरुष, षष्ठम लोभरहित पुरुष और सप्तम दानशील पुरुष. इन सातों तत्वों के संरक्षण से ही समाज और सृष्टि का संतुलन बना रहता है. चित्रकूट के संत शिरोमणि संकादिक महाराज भी गोकथा में शामिल हुए. मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज की उपस्थिति में बसामन मामा गौधाम परिसर में ऋषिकुलम आवास गृह का भूमिपूजन किया एवं पीपल का वृक्षारोपण किया.

महाराज श्री ने कहा कि युग निर्माता ब्रााहृण होता है जो संपूर्ण समाज की पीड़ा को अनुभव करे, वही सच्चा ब्रााहृण है. धर्माचरण से ही अर्थ और काम रूपी पुरुषार्थ की सिद्धि संभव है. जब अर्थ की प्राप्ति धर्म के अनुशासन और नियंत्रण में होती है, तब वह अर्थ अनर्थ का कारण नहीं बनता, बल्कि लोक कल्याण का साधन बनता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपवित्र धन कभी पवित्र कार्यों में नहीं लगता और जो धन धर्मकार्य में समर्पित होता है, वह स्वयं पवित्र हो जाता है.

कथा के समापन दिवस पर सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक सिरमौर दिव्यराज सिंह, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, विधायक सिहावल विश्वामित्र पाठक, पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी तथा बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए.

गौ माता का सम्मान ही मानवता का सम्मान है: उप मुख्यमंत्री

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि हम सबके लिए यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि पूज्य राजेंद्रदास महाराज के मुखारविंद से अमृतवाणी श्रवण का अवसर प्राप्त हुआ. एक ओर बसामन मामा की पुण्यभूमि, जहाँ दस हजार गौ माताओं के संरक्षण एवं संवर्धन का विशाल प्रकल्प संचालित है, और दूसरी ओर पूज्य महाराज श्री का दिव्य प्रवचन यह संगम सचमुच त्रिवेणी के समान है, जो दीर्घकाल तक समाज का कल्याण करता रहेगा. श्री शुक्ल ने कहा कि गौ माता का सम्मान ही मानवता का सम्मान है. यदि गौ माता का अपमान होगा तो मानव जाति का कल्याण संभव नहीं. उन्होंने कहा कि महाराज श्री के प्रवचनों से उन्हें गौ संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में और अधिक ऊर्जा एवं संकल्प प्राप्त हुआ है. उन्होंने भावुकता से कहा कि कभी-कभी जब वे किसी कठिन कार्य का दायित्व लेते हैं और वह सहज ही पूर्ण हो जाता है, तो उन्हें अनुभव होता है कि यह सब गौ माता की कृपा और उनकी प्रसन्नता का ही परिणाम है.

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