
ग्वालियर। रुस्तमजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बीएसएफ अकादमी में मध्यप्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी भोपाल के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. एम. के. हरबोला, आईआईटी कानपुर एवं डॉ. दिनेश कुमार शुक्ला, यूजीसी-डीएई, इंदौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. हरबोला ने अपने उद्बोधन में कहा कि अनुसंधान एक मानसिक अवस्था है, दुनिया को अलग दृष्टिकोण से देखने की प्रक्रिया है। सतत विकास पर शोध को जन-आंदोलन का रूप देना होगा। ‘चिपको आंदोलन’ इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. दिनेश कुमार शुक्ला ने वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों को सतत विकास की दिशा में उपयोगी बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर श्री मनीष चंद्र, कमांडेंट ने कहा कि हमें यह विचार करना चाहिए कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या कर रहे हैं और पृथ्वी को लौटाने की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। वहीं डॉ. प्रशांत कुमार जैन, प्राचार्य ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग में सस्टेनेबल मटेरियल्स के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भविष्य की निर्माण तकनीकों में पर्यावरण-अनुकूल सामग्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. उमा शंकर शर्मा, समन्वयक डॉ. चेतन पाठक एवं सह-समन्वयक डॉ. एच. एस. जाट ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के शोधार्थियों द्वारा 50 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत एवं प्रकाशित किए गए हैं।
