नई दिल्ली | भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए रूस के साथ ₹10,000 करोड़ का एक बड़ा रक्षा समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने दुनिया के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के लिए 288 नई मिसाइलों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। इस सौदे के तहत 120 शॉर्ट रेंज और 168 लॉन्ग रेंज मिसाइलें खरीदी जाएंगी। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने के लिए S-400 से कई मिसाइलें दागी गई थीं, जिसके बाद भंडार को फिर से भरने के लिए सरकार ने फास्ट ट्रैक आधार पर यह फैसला लिया है।
रक्षा मंत्री के नेतृत्व में हुई इस बैठक में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि कुल ₹3.60 लाख करोड़ के विशाल रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण फैसला फ्रांस से 114 नए ‘राफेल’ लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद और भारतीय वायु सेना के लिए बहु-भूमिका लड़ाकू विमान (MRFA) की परियोजना को आगे बढ़ाना है। साथ ही, वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए उच्च ऊंचाई वाले छद्म-उपग्रह (HAPS) और आधुनिक लड़ाकू मिसाइलों के अधिग्रहण को भी स्वीकृति मिली है। इन विमानों और हथियारों के आने से भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता और ‘प्रतिरोधक शक्ति’ में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी।
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, खरीदी जाने वाली अधिकांश मिसाइलों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही किए जाने की योजना है। यह कदम न केवल स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा, बल्कि लंबी दूरी के आक्रामक अभियानों में भारत को हवाई वर्चस्व भी प्रदान करेगा। सरकार ने यह मंजूरी ऐसे समय में दी है जब इसी साल जून और नवंबर में रूस से S-400 के दो शेष स्क्वाड्रन भी भारत पहुँचने वाले हैं। एक तरफ राफेल का दम और दूसरी तरफ S-400 का सुरक्षा कवच, भारत की इस दोहरी तैयारी ने पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी देशों की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।

