
ग्वालियर। कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्वालियर में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन योजनांतर्गत एक दिवसीय जिला स्तरीय सेमीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील कृषकों, नवयुवकों, मधुमक्खी पालकों, कृषक उत्पादक संगठनों, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों तथा तकनीकी स्टाफ ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना से हुई तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि दुर्गेश कुवंर सिंह जाटव ने मधुमक्खी पालन को लाभकारी व्यवसाय बताते हुए किसानों और युवाओं से इसे अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, जिससे मधुमक्खी पालन को भी लाभ मिलता है। अध्यक्षता करते हुए सहायक संचालक उद्यानिकी एम.पी. बुन्देला ने उद्यानिकी एवं मसालेदार फसलों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी और बताया कि बागवानी फसलों के साथ मधुमक्खी पालन करने से कम लागत में अधिक लाभ संभव है।
उपसंचालक कृषि रनवीर सिंह जाटव ने इसे आय दोगुनी करने का प्रभावी माध्यम बताया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के विशेषज्ञ अक्षत अग्रवाल ने शहद प्रसंस्करण इकाइयों के लिए उपलब्ध ऋण व अनुदान योजनाओं की जानकारी दी। डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने बताया कि मधुमक्खी पालन से परागण बढ़ता है, जिससे फसलों की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होता है।
डॉ. अशोक यादव केवीके, मुरैना ने वैज्ञानिक तकनीकों से शहद उत्पादन पर प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एस.पी.एस. तोमर ने कहा कि ग्वालियर की जलवायु इस व्यवसाय के लिए अनुकूल है। रमाकांत शर्मा ने खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से शहद विपणन की जानकारी दी। अंत में सफल मधुमक्खी पालकों ने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में लगभग 220 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजीव सिंह चौहान ने दिया, संचालन डॉ. एस.सी. श्रीवास्तव ने किया।
