
इंदौर: पोलोग्राउंड स्थित शासकीय सांदीपनि अहिल्याश्रम कन्या उ.मा. विद्यालय में भारतीय राजनयिक एवं संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मीपुरी पहुँची. उन्होंने विद्यालय के विकास कार्यों में योगदान देने की मंशा व्यक्त की और परिसर का अवलोकन किया. साथ में स्कूल प्रिंसिपल ओर अन्य अधिकारी मौजूद रहे.इस अवसर पर श्रीमती पुरी ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी माताजी मालती देसाई एवं मौसी कमलिनी देसाई ने इसी संस्थान से शिक्षा प्राप्त की थी. वे अक्सर यहां की शिक्षा, संस्कार और प्रेरणादायी वातावरण की चर्चा करती थीं. श्रीमती पुरी ने कहा कि इस संस्थान से मिली प्रेरणा उनके परिवार के लिए जीवनभर की पूंजी रही है.
वे सांदीपनि अहिल्याश्रम में अधोसंरचना एवं शैक्षणिक सुविधाओं के उन्नयन हेतु सहयोग देने आई हैं. उनका उद्देश्य है कि विद्यालय में आधुनिक संसाधनों का विस्तार हो, ताकि यह संस्थान एक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित हो सके. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन एवं समाज के सहयोग से विकास कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकेगा. उल्लेखनीय है कि इंदौर की यह संस्थान हमेशा से ही महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक रही है तथा नई पीढ़ी को भी शिक्षा और संस्कार प्रदान कर रहा है.
1913 में की थी स्थापना
उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक संस्थान की स्थापना 23 जून 1913 को तत्कालीन होलकर स्टेट के महाराजा तुकोजीराव होलकर (तृतीय) द्वारा चन्द्रावती महिला विद्यालय के रूप में की गई थी, जिसका नाम महारानी चन्द्रावती होलकर के नाम पर रखा गया. इसी वर्ष 16 जून 1913 को अहिल्या आश्रम की स्थापना भी की गई थी, जिसका उद्देश्य विधवा, परित्यक्ता, अनाथ एवं बेसहारा महिलाओं को आश्रय, शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करना था. स्वतंत्रता पश्चात 1948 में होलकर राज्य के भारत संघ में विलय के बाद दोनों संस्थाओं का एकीकरण कर ‘शासकीय अहिल्याश्रम एवं चन्द्रावती महिला उ.मा. विद्यालय’ नाम दिया गया. समय के साथ महिला के स्थान पर कन्या शब्द प्रचलन में आया और वर्तमान में यह संस्था शासकीय सांदीपनि अहिल्याश्रम कन्या उमा विद्यालय के रूप में संचालित है
