नई दिल्ली/वॉशिंगटन | भारत और अमेरिका के बीच चल रहे अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। व्हाइट हाउस ने अपने पूर्व में जारी किए गए आधिकारिक तथ्य पत्र (Fact Sheet) को संशोधित करते हुए कुछ प्रमुख दालों को आयात शुल्क में छूट वाली सूची से बाहर कर दिया है। इस बदलाव के बाद अमेरिकी दालों पर आयात शुल्क घटने की संभावनाएं फिलहाल धुंधली पड़ गई हैं। व्यापारिक हलकों में इस कदम को भारत के घरेलू कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि भारत अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका से भारी मात्रा में दालों का आयात करता है।
दालों को सूची से हटाए जाने के बावजूद, संशोधित व्यापार समझौते में कई अन्य प्रमुख उत्पादों को बरकरार रखा गया है। नई सूची के अनुसार, सूखे अनाज, लाल ज्वार, सूखे मेवे और कुछ विशेष फलों पर शुल्क कटौती का प्रावधान बना रहेगा। इसके अलावा, सोयाबीन तेल, शराब और वाइन जैसे अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजारों में सुगम प्रवेश देने के लिए रियायतें दी जाएंगी। औद्योगिक सामानों पर मिलने वाली छूट के नियमों में भी फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। अमेरिकी निर्यातकों के लिए यह खबर मिली-जुली रही है, क्योंकि वे लंबे समय से भारतीय बाजार में दालों पर कम टैक्स की मांग कर रहे थे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दालों को हटाने के फैसले से भारतीय उपभोक्ताओं को कीमतों में तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम हो गई है। व्यापारिक अनिश्चितता के बीच, अब दोनों देशों की नजरें अगले दौर की उच्च स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समझौतों में इस तरह के संशोधन सामान्य प्रक्रिया हैं, जहाँ दोनों देश अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। यदि भविष्य में दालों पर शुल्क कम नहीं होता है, तो अमेरिकी किसानों को वैश्विक बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जबकि भारत अपनी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

