एआई कंटेंट पर सख्ती: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नई जिम्मेदारी, आम एडिटिंग रहेगी छूट में

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार कंटेंट को लेकर पहली बार स्पष्ट नियम बनाएं है। आईटी इंटरमीडियरी नियमों में संशोधन के जरिए अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एआई-जनित वीडियो, ऑडियो और विजुअल सामग्री की पहचान और लेबलिंग अनिवार्य कर दी गई है, जबकि सामान्य एडिटिंग और शैक्षणिक उपयोग को छूट दी गई है।

भारत सरकार ने आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियम 2026 के तहत एआई से तैयार कंटेंट, जैसे डीपफेक वीडियो, सिंथेटिक ऑडियो और बदले हुए विजुअल

को औपचारिक नियमन के दायरे में ला दिया है। गजट नोटिफिकेशन G.S.R. 120(E) के जरिए अधिसूचित ये नियम 20 फरवरी से प्रभावी होंगे और इस पर संयुक्त सचिव अजीत कुमार के हस्ताक्षर हैं।

नए प्रावधानों के तहत इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनुपालन का दबाव अधिक रहेगा। अब जब भी कोई यूज़र कंटेंट अपलोड करेगा, प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह एआई-जनित है या नहीं। केवल यूज़र की स्वयं-घोषणा पर निर्भर रहने के बजाय कंपनियों को ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए कंटेंट के फॉर्मेट, स्रोत और प्रकृति की क्रॉस-वेरिफिकेशन भी करनी होगी, तभी उसे लाइव किया जाएगा।

सरकार ने सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) की औपचारिक परिभाषा भी तय कर दी है, जिसमें किसी भी प्रकार की ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल सामग्री शामिल होगी जो कृत्रिम रूप से तैयार की गई हो। ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल लगाना अनिवार्य होगा ताकि यूज़र तुरंत पहचान सके कि सामग्री एआई से बनी है। साथ ही प्लेटफॉर्म्स को स्थायी मेटाडेटा और यूनिक आइडेंटिफायर भी एम्बेड करने होंगे, जिन्हें बाद में बदला या हटाया नहीं जा सकेगा।

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर एडिटिंग एआई कंटेंट की श्रेणी में नहीं आएगी। सामान्य कलर करेक्शन, नॉइज़ रिडक्शन, कंप्रेशन, ट्रांसलेशन जैसी रूटीन एडिटिंग जब तक वे मूल अर्थ को नहीं बदलतीं नियमों से मुक्त रहेंगी। इसी तरह रिसर्च पेपर्स, ट्रेनिंग मटेरियल, पीडीएफ, प्रेजेंटेशन और उदाहरण के तौर पर बनाए गए ड्राफ्ट दस्तावेज भी इस सख्ती से बाहर रखे गए हैं।

इस तरह नए नियमों का फोकस भ्रामक और नकली डिजिटल सामग्री पर लगाम लगाने के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना है, जबकि सामान्य रचनात्मक और शैक्षणिक उपयोग को राहत दी गई है।

 

 

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