चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव 2026 से पहले चुनाव ड्यूटी वाले अधिकारियों के तबादले के दिये निर्देश

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (वार्ता) चुनाव आयोग ने मंगलवार को 2026 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाते हुये चुनाव ड्यूटी वाले अधिकारियों के तबादले को लेकर दिशा निर्देश दिये हैं।

आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी की सरकारों को चुनाव कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हैं। आयोग ने इस संबंध में राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को 27 फरवरी 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट भेजने को कहा है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो अधिकारी सीधे चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हैं, उन्हें उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। साथ ही यदि कोई अधिकारी पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन वर्ष पूरे कर चुका है या 31 मई 2026 (पुडुचेरी के लिए 30 जून 2026) तक तीन वर्ष पूरे करने वाला है, तो उसे भी उस जिले से हटाना अनिवार्य होगा।

आयोग के निर्देशों के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ), रिटर्निंग अधिकारी (आरओ/एआरओ), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ, नगर निगम अधिकारी और चुनाव कार्य में लगे अन्य प्रशासनिक अधिकारी इस नियम के दायरे में आएंगे। आयोग के अनुसार पुलिस विभाग में एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी, एसपी, अतिरिक्त एसपी, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर तक के अधिकारी भी इसमें शामिल किए गए हैं, खासकर वह भी जो चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं।

आयोग ने यह भी कहा है कि किसी भी अधिकारी को उसी विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा पोस्ट नहीं किया जाएगा, जहां वह पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव में तैनात रहा हो। जिन अधिकारियों के खिलाफ पहले चुनाव ड्यूटी में लापरवाही या अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है, उन्हें भी चुनाव संबंधी कार्य नहीं दिया जाएगा।

आयोग के निर्देशों के मुताबिक चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों को नामांकन की अंतिम तिथि के दो दिन के भीतर शपथपत्र देना होगा कि उनका किसी प्रत्याशी या राजनीतिक नेता से निकट संबंध नहीं है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। गलत जानकारी देने पर विभागीय कार्रवाई होगी।

आयोग का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और मतदाताओं का भरोसा मजबूत करना है, ताकि आगामी चुनाव स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से कराये जा सकें।

 

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